बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ चतुर्दशोऽध्यायः । ७२१ कर्क राशि में अत्यन्त पाप करने वाला, दूसरे के धन को हरण करने वाला, पूर्त कार्य (कूंआं आदि) करने वाला, सिंह राशि में देवस्थान का नाश करने वाला, कन्याराशि में धर्म में प्रेम और सत्कर्म करने वाला।।१०३।। जूके परेषां धनदश्च पूर्तं करोति चापेऽपि च वृश्चिकेतु । परस्वहर्ता परदारसक्तो मृगेऽपि चैवं घटभे कृतज्ञः ।।१०४।। तुला में दूसरों को धन से पूर्ण करने वाला, धन में भी पूर्वोक्त फल, वृश्चिक राशि में दूसरे के द्रव्य को हरण करने वाला दूसरे की स्त्री में आसक्त, मकर में भी पूर्वोक्त फल, कुम्भ राशि में कृतज्ञ।।१०४।। यज्ञस्य कर्त्ता झषभे तथैव पूर्तादिकारी वहुयोजकःस्यात्। और यज्ञकर्त्ता और मीन राशि में पूर्त आदि काम को करने वाला और अनेक योजना करने वाला होता है। अथ सूर्यादीनां कालांश फलम् - नर्तको गायको वंदी शिल्पी याञ्चापरस्ततः ।।१०५।। सूर्यादि के कालांश में उत्पन्न होने से क्रम से नाच को जानने वाला गाने वाला, राजा की स्तुति करने वाला, कारीगरी को जानने वाला, याचक।।१०५।। गायको नर्तको भारवाही प्राणतियोजकः । प्रेष्यश्च भारकोवंदी याचको धातुवादकः ।।१०६।। गायक, नर्तक, बोझा ढोने वाला, नम्र रहने वाला दास वृत्ति करने वाला, वंदी, याचक, धातु के कामको करने वाला।।१०६।। वेदाध्यायी स्मृतिज्ञस्तु शैवाश्रमकृतश्रमः । शिल्पलेखनकर्त्ता च मीमांशान्यायतर्कवित् ।।१०७।। वेद पढ़ने वाला, स्मृति शास्त्र को जानने वाला, शिवदीक्षा में प्रवीण, शिल्प को लिखने वाला, मीमांशा न्याय तर्क का जानकार।।१०७।। पंचरात्रार्थशास्त्रज्ञः इतिहासपुराणवित् । आयुधश्रमहेतुश्च आयुर्वेदकृतश्रमः ।।१०८।। अर्कात्क्लांशतश्चैव क्रमादेवं प्रकीर्त्तितः । आगम (तंत्र) को जानने वाला, अर्थ शास्त्र को जानने वाला, आयुध (शस्त्र) को बनाने वाला, आयुर्वेद (दवा) का ज्ञाता होता है।।१०८।।