बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 75, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ेंराशिदृष्टिभेदाध्यायः ७७ कर्कः सिंहं परित्यज्य वृश्चिकं च घटं वृषम्। तुलापि वृश्चिकं त्यक्त्वा कुम्भं सिंहं तथा वृषम्।।५।। कर्क राशि सिंह को छोड़कर वृश्चिक, कुंभ और वृष को; तुला राशि वृश्चिक को छोड़कर कुंभ, सिंह और वृष को।।५।। नक्रो घटं परित्यज्य मेषं कर्कं तुलां द्विज। सिंहः कर्कं परित्यज्य नक्रं मेषं तुलां द्विज।।६।। कर्क राशि सिंह को छोड़कर वृश्चिक, कुंभ, वृष को, मकर राशि कुंभ राशि को छोड़कर मेष, कर्क, तुला को।।६।। वृश्चिकस्तु तुलां त्यक्त्वा कर्कं मेषं मृगं तथा। कुम्भश्च मकरं त्यक्त्वा मेषं कर्कं तुलां द्विज।।७।। सिंह राशि कर्क राशि को छोड़कर मकर, मेष, तुला को; वृश्चिक राशि तुला को छोड़कर कर्क, मेष, मकर को; कुंभ राशि मकर राशि को छोड़कर मेष, कर्क, तुला को।।७।। युग्मः कन्याधनुर्मीनान् पश्यतीति द्विजोत्तम। कन्या धनुर्मीनयुग्मं पश्यत्येवं न संशयः।।८।। मिथुन राशि कन्या, धन, मीन को; कन्या राशि धन, मीन, मिथुन को।।८।। धनुर्झषयुग्मकन्याः पश्यति द्विजसत्तम। मीनो युग्माङ्गको दण्डान् पश्यति सुमते द्विज।।९।। धन राशि मीन, मिथुन, कन्या को और मीन राशि मिथुन, कन्या और धन राशि को देखती है।।९।। सूर्यादयः क्रमेणैव पश्यन्ति च परस्परम्। राशित्रयं त्रयं विप्र सर्वराशिगता ग्रहाः।।१०।। हे विप्र ! इसी प्रकार सूर्य आदि ग्रह भी तीन-तीन राशियों के क्रम से सभी राशियों को देखते हैं।।१०।। चरेषु संस्थिताः खेटाः पश्यन्ति चरसंस्थितान्। स्थिरेषु संस्थिताः खेटाः पश्यन्ति चरसंस्थितान्।।११।।