भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 752, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 752

७४० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । चन्द्रस्य फलम् - धनहानिं शशीपापैः शिरोनेत्ररुजं व्यथा । शत्रुभिः पापकरणं धननाशं गमागमौ ॥६६॥ चन्द्रमा पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो धन की हानि, शिर और नेत्र में रोग होता हैं। शत्रुग्रह से दृष्ट हो तो पापकर्म करने वाला, धननाशक और भ्रमण करने वाला होता हैं॥६६॥ शुभैररोगतां सौख्यं धनलाभं च बंधुभिः । मित्रैश्च धन संसिद्धिं करोतीह न संशयः ॥६७॥ शुभग्रहों से दृष्ट हो तो नैरूज्य, सुख, द्रव्य का लाभ भाइयों से होता है। मित्रग्रह से दृष्ट हो तो मित्रों द्वारा धन का लाभ होता है।।६७।। भौमस्य फलम् - पापैर्दृष्टः कुजः क्षेत्रधनधान्यादिनाशनम् । शत्रुभिर्बंधनं रोगं चाहवे दूरवासनम् ॥६८॥ यदि भौम पापग्रहों से देखा जाता हो तो क्षेत्र (भूमि) धन, धान्य का नाश करता हैं, शत्रुग्रह की दृष्टि हो तो बंधन, रोग, युद्ध दूर यात्रा हो।।६८।। शुभैस्तु विजयं देशक्षेत्रलाभं सुहृच्छुभम् । मित्रैश्च धन संसिद्धिं करोतीह न संशयः ॥६९॥ शुभग्रह की दृष्टि हो तो विजय, देश, भूमि का लाभ, मित्र से लाभ होता हैं, मित्रग्रह से दृष्ट हो तो धन का लाभ होता है।।६९।। बुधस्यफलम् - शुभैर्बुधोलिपिज्ञानं विद्यालाभं च कौशलम् । मित्रैर्भूषाधनक्षौमरत्नलाभं च शत्रुभिः ॥७०॥ बुध शुभग्रहों से देखा जाता हो तो लिपि का ज्ञान, विद्या का लाभ कुशलता प्राप्त हो। मित्रग्रहों से देखा जाता हो तो आभूषण, धन, ऊन और रत्न का लाभ हो।।७०।। अतिसारं च दुर्बुद्धि प्रतीकेषु सदोद्यमम् । पापैर्महाविवादं च कुक्षौ शूलं च वर्धते ॥७१॥ शत्रुग्रहों से दृष्ट हो तो अतिसार, दुर्बुद्धि, शरीर के लिये उद्योगी हो, पापग्रहों से दृष्ट हो तो बड़े विवाद से युक्त और कुक्षि में शूलरोग की वृद्धि वाला हो।।७१।।