बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ वर्षचर्यादिफलाध्यायः । ७४३ गुरु वली हो तो शुभ धन का लाभ होता है, शुक्र बली हों तो राजकार्य से द्रव्य और यश का लाभ होता है।।८४।। मंदे दासाधिपत्येन धनायतिररिंदमात् । कालयानबलाधिक्ये रवौ भौमे शनैश्चरे ।।८५।। शनि बली हो तो दासों की स्वामिता और शौर्य से धन का लाभ होता है।।८५।। काल-अयनबलयुक्तग्रहफलम् - मंत्रोपदेशविधिना पाखंडिपदसंश्रयात् । दासभावेन कृष्णोन्दौ कृषितो विद्यायान्यथा ।।८६।। सूर्य-भौम-शनि काल और अयन बल से युक्त हों तो मंत्रोपदेशपाखंड और दासता से जीवन निर्वाह करने वाला, कृष्ण पक्ष का चंद्रमा यदि दोनों बलों से युक्त हो तो खेती और विद्या से जीवन निर्वाह करने वाला, गुरु, शुक्र, बुध और शुक्लपक्ष का चन्द्रमा दोनों बलो से युक्त हो तो विद्या और धन से जीवन निर्वाह करनेवाला होता है।।८६।। चेष्टाबलयुक्त ग्रहाणांफलम् - गुरौ शुक्रे बुधे पाथोनिधिजेचात्रिसंभवे । विद्यांया वाधने संख्यावलदिग्वलवृद्धिः ।।८७।। नानाविध यतिः प्रोक्ता इति चेष्टाधिकेषु तु । केचिदुक्तं यथापूर्वं विशेषादेव निर्णयः ।।८८।। यदि सूर्यादिग्रह चेष्टाबल से युक्त हों तो अनेक प्रकार की विद्या द्वारा द्रव्य का लाभ होता है।।८७-८८।। बलिष्ठो दायंरश्म्युक्त फलं सर्वं करोति वै । न्यूनाधिकेऽनुपातेन फलमेवं विचिन्त्यताम् ।।८९।। गुरु शुक्र बुध यदि बली हों तो रश्म्युक्त पूर्णफल को देते हैं। यदि न्यूनाधिक बल हो तो अनुपात द्वारा फल को समझना चाहिये।।८९।। इष्टबलानुसारेण फलम् - सौम्येष्विष्टफलाधिकेषु नितरां श्रीमान्सुशीलोगुणी- मित्रेष्वेवमतीवधर्मनिरतो दाता सुखीसत्ववान् ।