बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७५८ - बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । सूर्यस्थितांशतुल्यां वा तिथिं प्रोवाच भार्गवः । राशौ रात्रिदिवाख्ये च जन्म स्यात्तु विलोमतः ॥५५॥ तिथिज्ञान-सूर्य जिस त्रिंशांश में है उसके तुल्य तिथि कहना ऐसा शुक्राचार्य का मत है। दिन-रात्रि का ज्ञान— प्रश्नलग्न राशि बली हो तो दिन में और दिवा बली हो तो रात्रि में जन्म कहना।।५५।। प्राण-लग्नादेः ज्ञानम् - गतप्राणैर्जन्मकाले ते च प्राणा भवन्त्यथ । यद्राशिगः शशी मासः समं वा स्पृशदंगकम् ॥५६॥ प्रश्न समय जितने प्राण बीत चुके हों उतने ही प्राण जन्म समय में जानना चाहिये। मास-राशि-लग्न का ज्ञान - प्रश्न समय जिस राशि का चन्द्र हो उसी राशि के नाम वाला मास होता है जैसे मेष में चैत्र आदि।।५६।। तत्रिकोणावलाधिक्यं राशिर्लग्नात्तु यावति । चंद्रस्तावतिभं चापि जन्मलग्नं विनिर्दिशेत् ॥५७॥ प्रश्न समय में चन्द्रमा जिस राशि को स्पर्श करता हो चाहे सम हो या विषम इससे त्रिकोण की जो राशि दोनों में बली हो वही राशि होती है। मेषादि गणना से जितने संख्यक राशि पर चन्द्र हो उतनी ही संख्या की लग्न होती है। जैसे मीन प्रश्न लग्न हो तो मीन राशि अन्य लग्नों से अन्य राशि जानना।।५७।। जन्मनक्षत्र ज्ञान- मीने मीनं तु लग्नं वा तथान्यैस्त्वन्य लग्नभम् । छायया संयुता यामवार्क्षतिथिराशयः ॥५८॥ प्रश्न समय प्रश्नकर्त्ता के छाया को पैर से नाप कर उसमें प्रहर, वार, तिथि को जोड़ दे २७ से अधिक हो तो २७ से भाग देकर शेष संख्या के तुल्य धनिष्ठादि नक्षत्र होता है।।५८।। यावंस्तस्तु धनिष्ठादिजन्मनक्षतद्विनिर्दिशेत् । कालांशादिषु यत्रोक्तमृक्षं तद्वा भवेदिदम् ॥५९॥ अथवा पूर्व में कालांशादि में जो नक्षत्र कहा है वही नक्षत्र होता है। कालांश का आधां होरा कहा है वही होरा होती है।।५६-५९।। प्रकारांतरेणमासादिज्ञानम् - कालांशाद्यर्धहोरानां प्रोक्तहोरैर्विभावयेत् । पृथग्लिप्तीकृतं लग्नं वर्गणाभिर्हतं पुनः ॥६०॥