भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 769, कुल 800 में से

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प्रश्नाध्यायः । ७५७ यदि पूर्वोक्त स्थान में पापग्रह हों तो मृत्यु कहना। किन्तु शुभग्रह नीचादि स्थान में और पापग्रह उच्चादि स्थान में न हों तो पूर्वोक्त फल होता है। १ । २ । ९ । ५ । १ । ७ । १० इन स्थानों में जन्मलग्न से वा प्रश्नलग्न से शुभग्रह हों तो शुभ फल होता है ।।५०।। अयनादि ज्ञानम् - मृगकर्क्यादितः सूर्याराशिपूर्वापरार्धतः । शनिशुक्रारचंद्रज्ञगुरवः शिशिरादयः ।।५१।। जन्मकाल या प्रश्नकाल में मकरादि ६ राशि के अन्दर सूर्य हों तो उत्तरायण और कर्कादि ६ राशि के अंदर हों तो दक्षिणायन होता है। इसी प्रकार मकर, कुंभ, मीन, मेष, वृष, मिथुन राशियों के पूर्वार्ध में क्रम से शनि, शुक्र, भौम, चंद्र, बुध, गुरु हों तो क्रम से शिशिर वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद्, हेमन्त ऋतु कहना इसी प्रकार से कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धन राशियों के उत्तरार्ध में यदि पूर्वोक्त ग्रह हों तो शिशिर आदि ऋतु कहना।।५१।। अर्को ग्रीष्मस्ततोऽन्यैर्वा वायनादृतुरेव च । शुक्रारमंदचंद्रज्ञ जीवाश्च परिवर्तिताः ।।५२।। इसी प्रकार प्रश्न लग्न में सूर्यादि ग्रह हों तो भी ग्रीष्म, वर्षा, शरद्, हेमन्त, शिशिर, वसंत ऋतु कहना। अथवा अयन से ऋतु कहना। शुक्र, मंगल, शनि, चंद्र, बुध, गुरु इनमें जो द्रेष्काधिपति हो उसके ऋतु को कहना वा जो नवांश हों उससे ऋतु कहना।।५२।। वर्ष-मास-तिथिज्ञानम् - लग्नद्रेष्काणपाः प्रोक्ता नवांशेनैव चापरे । तत्पूर्वपरतो मासौ तिथिः स्यादनुपाततः ।।५३।। जो पूर्व प्रकार से ऋतु निर्णीत हुआ हो वह यदि राशि के पूर्वार्ध की हो तो उस ऋतु का पूर्वमास और उत्तरार्ध की हो तो उत्तर मास जानना चाहिये। ऋतु के भुक्त भोग्य द्वारा अनुपात करके तिथि का ज्ञान करना चाहिये।।५३।। वर्ष ज्ञानम् - लग्नत्रिकोणगो जीवो नवांशस्थोऽथवा भवेत् । ज्ञात्वा वयोऽनुरूपेण ह्यनुमानवशात्समाः ।।५४।। प्रश्न लग्न से त्रिकोण (९।५) में गुरु जिस राशि में हो उसी राशि के गुरु में जन्म हुआ है, यदि गुरु त्रिकोण में न हो तो जहां कहीं जिस राशि में जिस नवांश में हो उस नवांश राशि के गुरु में जन्म कहना। किन्तु अवस्था के अनुमान से वर्ष का निर्णय करना चाहिये।।५४।।

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