बुद्धचरितम् (महाकवि अश्वघोष - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Buddhacharitam of Mahakavi Ashvaghosa with Hindi Commentary
महाकवि अश्वघोष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकाशक संस्कृत भवन, कठोतिया पो. काझा, जिला पूर्णियाँ (बिहार) प्रथम संस्करण 1000 द्वितीय संस्करण 1000 तृतीय संस्करण 1600 मुद्रक ओमप्रकाश कपूर ज्ञानमण्डल यन्त्रालय बनारस 4625-11
निवेदन ३ प्रथम सर्ग : भगवान् का जन्म ४ द्वितीय सर्ग : अन्तःपुर विहार १० तृतीय सर्ग : संवेग-उत्पत्ति १४ चतुर्थ सर्ग : स्त्री-निवारण १९ पञ्चम सर्ग : अभिनिष्क्रमण २६ षष्ठ सर्ग : छन्दक-विसर्जन ३२ सप्तम सर्ग : तपोवन-प्रवेश ३७ अष्टम सर्ग : अन्तःपुर-विलाप ४१ नवम सर्ग : कुमार-अन्वेषण ४७ दशम सर्ग : श्रेण्य का आगमन ५२ एकादश सर्ग : काम-निन्दा ५५ द्वादश सर्ग : अराड-दर्शन ६१ त्रयोदश सर्ग : मार की पराजय ६९ चतुर्दश सर्ग : बुद्धत्व-प्राप्ति ७४ 15वाँ सर्ग : धर्मचक्र-प्रवर्तन ७९ 16वाँ सर्ग : अनेक शिष्य ८२ 17वाँ सर्ग : महाशिष्यों की प्रव्रज्या ८५ 18वाँ सर्ग : अनाथपिण्डद की दीक्षा ८७ 19वाँ सर्ग : पितापुत्र-समागम ९१ 20वाँ सर्ग : जेतवन-स्वीकार ९४ 21वाँ सर्ग : प्रव्रज्या-स्रोत ९६ 22वाँ सर्ग : आम्रपाली के उपवन में ९९ 23वाँ सर्ग : आयु निश्चित करना १०१ 24वाँ सर्ग : लिच्छवियों पर अनुकम्पा १०३ 25वाँ सर्ग : निर्वाण-पथपर १०६ 26वाँ सर्ग : महापरिनिर्वाण १०९ 27वाँ सर्ग : निर्वाण की प्रशंसा ११३ 28वाँ सर्ग : धातु-विभाजन ११७ परिशिष्ट 1 १२१ अतिरिक्त टिप्पणी एवं पाठान्तर