चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३२ चाणक्यनीतिदर्पणः
यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निघर्षणं छेदनतापताडनैः । तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते । त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा ॥ २ ॥
दोहा--आगिताप घसि काटि पिटि, सुवरन लख विधि चारि । त्याग शील गुण कर्म तिमि, चारिहि पुरुष विचारि ॥२॥
जैसे रगड़ने से, काटने से, तपाने से और पीटने से, इन चार उपायों से सुवर्ण की परीक्षा की जाती है, उसी प्रकार त्याग, शील, गुण और कर्म इन चार बातों से मनुष्य की परीक्षा होती है ॥२॥
तावद्भयेन भेतव्यं यावद् भयमनागतम् । आगतं तु भयं वीक्ष्य प्रहर्तव्यमशंकया ॥ ३ ॥
दोहा--जौलौं भय आवै नहीं, तौलौं डरे विचार । आये शंका छाड़ि के, चाहिय कीन्ह प्रहार ॥३॥
भय से तभी तक डरो, जब तक कि वह तुम्हारे पास तक न आ जाय । और जब आ ही जाय तो डरो नहीं बल्कि उसे निर्भीक भाव से मार भगाने की कोशिश करो ॥३॥
एकोदरसमुद्भूता एकनक्षत्रजातकाः । न भवन्ति समाः शीला यथा बदरिकण्टकाः ॥४॥