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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१४७को कोचना १४९-लोररुका साँपको कोचना १५ १५५ लोरकका कोचना और विलाप करना १५६-गारुडीका आना और लोरकका उसके पाँव पडना १ ७-लोरकका अपना सबस्व देनेका वादा करना १५८-गारुडीका मन्त्र पढना और चाँदका जीवित होना १५९-लोरकका गारुडीको सारे आभूषण देना १६०-कविकी उक्ति । सारंगपुरमें लोरक— महीपतिके साथ जुआ— महिपतिके साथ युद्ध— महसिया द्वारा लोरकका सम्मान (?)— मधुकरके साथ युद्ध (?)— चाँदको तीसरी बार साँप काटना— ( उपर्युक्त घटनाओंस सम्बध रखनेवाला अंश अनुपलब्ध है। इनका वर्णन कितने कड़बकौमें किया गया है, बताना कठिन है। हमने इनका वर्णन कड़बक १६१ १७२में होनेका अनुम्यन किया है। कड़बक १६१से लोरकके धारगपुर पहुँचनेका अनुमान होता है। इसके अतिरिक्त चार खण्डित कड़बक और उपलब्ध हैं जिनसे अन्य घटनाओका आभास मात्र होता है।) चाँदका स्वप्न वर्णन— १७१-चाँदका होशमें आना और स्वप्न देखनेकी बात कहना; १७४-स्वप्नमें विधाता लोरकको आदेश । दूँदू द्वारा चाँदका अपहरण— १७५-चादको मन्दिरमें बैठाकर लोरकका जाना और दूँदा (योगी) का आना; १७६-दूँदा (योगी) का जादू करना और चाँदका विस्मृत होना १७७-लोरक का लौटकर आना और चादाको न पाना १७८—दूँदा (योगी) का पता लगाना १७९-दूँदा और लोरक दोनोंका चाँदको अपनी पत्नी बताना १८ -सिद्धका उन्हें समासे झगड़ेका फैसला करानेकी सलाह देना; १८१-सभासे लोरककी फरियाद; १८२-सभाका लोरकसे प्रश्न; १८३-लोरकका उत्तर; १८४- योगीका चाँदको अपनी पत्नी बताना ( इस अंशके आगेके कुछ कड़बक अप्राप्य हैं ।) हरदोईमें लोरक और चाँद— १८९-लोरक-चाँदका हरदोईकी सीमापर पहुँचना; १९ -शिकारको जाते हुए राय सेतमका लोरकको देखना १९१-लोरकके सम्बन्धमें मार्गका जानकारी प्राप्त करना; १९२-लोरकका परिचय बताना; १९३-राय सेतमको लोरकका परिचय मिलना; १९४-लोरकका रायके पास जाना १९५-रायका लोरकका सम्मान करना १९६-रायका लोरकके पर पारिवारिक उपयोगकी सामग्री भेजना १९७-लोरक का नाच आदिको दान देना ।