चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७८ पर पहुँचना; १७—चाँदके रूप पर मल्लाहका मोहित होना; १८—मल्लाहका चाँदसे परिचय पूछना; १८-लोरकका मल्लाहको गिरा कर नाव पार ले जाना। (इस अंशमें कुछ कड़बकों का अभाव जान पड़ता है। गङ्गा तट तक पहुँचन और मल्लाह के साथ होनेवाली घटनाका स्वरूप अस्पष्ट है।) बाभन-लोरक युद्ध— १८-गङ्गा तटपर बाभनका आना; १ ९-बाभनका गंगा में कूदकर लोरकका पीछा करना; १११-चाँदका बाभनके आ पहुँचनेकी सूचना लोरकको देना; ११०-चाँदका बाभनसे अपने उपेक्षिता होनेकी बात कहना; १११-बाभनका उत्तर और लोरकपर बाण छोड़ना; ११४-चांदका लोरकको सचेत करना और बाभनका पुन' बाण मारना; १२५-बाभनका हार मानना; ११६-बाभनका खेद प्रकट करना। लोरक और वियाछा (?) संघर्ष— ११७-मार्गमें लोरक-चाँदसे बिया (?) का भेंट; ११८- किसीका राय (?) से चाँदकी प्रशंसा; ११९-राय गमोउका लोरकके पास आना (?) १२०-लोरकका वियाछानीसे युद्ध; १२१-लोरकका बियाछा हाथ काटना; १२२-वियाछा रायसे परिवाद करना १२४-रायका वियाछे हाल पूछना और वियाछा बताना (यह अंश अपूर्ण है। उपलब्ध कड़बकोंसे कथा-क्रमका पता नहीं चलता। कड़बकोंका क्रम भी अनिश्चित है। उनके व्यतिक्रम होनेकी सम्भावना अधिक है।) राय करिंगा और लोरक— १२५-राय करिंगाका मन्त्रियोंसे परामर्श; १२६-रायका लोरकको बुलानेके लिए ब्राह्मण भेजना; १२७-लोरकसे ब्राह्मणोंका निवेदन करना; १२८-लोरकका रायके पास आना १२९-लोरकका रायसे बातचीत; १३०-रायका लोरकका सम्मान करना; १३१-लोरकको भेंट देकर रायका विदा करना। चाँदको साँपका डसना— १३२-लोरक-चाँदका ब्राह्मण के घर ठहरना और रात में चाँदको साँपका डसना १३३-चाँदका मूर्छित होना १३४-चाँदके वियोगमें लोरकका रोना; १३५- लोरकका विलाप; १३६-गारुड़ीका आकर मन्त्र पढ़ना १३७-चाँदका जीवित हो उठना। लोरकका महीटौ-बहेलियोंसे युद्ध— (कड़बक १३८-१४३ अप्राप्य हैं। इनके बीचका केवल एक कड़बक उपलब्ध है जिससे इस घटनाका अनुमान मात्र होता है) चाँदको दुबारा साँप काटना— १४४-लोरक-चाँदका बनखण्डमें रुकना और चाँदको साँप काटना; १४५ १४७ चाँदका मूर्च्छित होना और लोरकका विलाप करना;; १४८-लोरकका चमकके