चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 103, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें८ मैनाका वियोग-वर्णन— ३९८—मैनाका दुख कथन; ३९९—गोविन्दका टॉडर नायक सिरजनको बुलाना ४००—सिरजनका परिचय बताना; ४०१—गोविन्दका छाना और मैनाका सिरजनके पैरोंपर गिरना; ४०२—मैनाका व्यथा-कथन करना—सावन मास ४०३—भादों मास; ४०४—कुंभार मास; ४०५—कार्तिक मास; ४०६—अगहन मास ४०७—पूस मास; ४०८—माघ मास; ४०९—फागुन मास ४१०—विरह अवस्था कहना ४१२-४१५ लोरकके पास सन्देशा लेजानेका आग्रह करना; ४१६—गोविन्दका सिरजनसे अनुरोध करना। सिरजनका लोरकको सन्देश— ४१७—सिरजनका हरदीपाटन रवाना होना; ४१८—विरहदाहके कारण मार्गकी अवस्था ४१९ हरदीपाटन पहुँचकर सिरजनका लोरकसे मिलने जाना ४२०—द्वार पालका लोरकको सिरजनके आनेकी सूचना देना; ४२१—लोरकका सिरजनसे भेंट करना; ४२२-४२४—सिरजनका भाग्य कथनके बहाने मैनाकी चर्चा करना ४२५—लोरकका मैनाके सम्बन्धमें बिगाड़; ४२६—सिरजनका गोवररा समाचार कहना ४२७—अपने बनिजक सम्बन्धमें बताना ४२८-४२९—मैनाकी अवस्थाका कथन ४३०—मैनाकी दुरवस्था सुनकर लोरकका दुखी होना; ४३१—मैनाके समाचारसे चाँदाका परेशान होना। लोरकका घर लौटना— ४३२—राज छतमका लोरकको विदा करना ४३३—साथमें सहायक देना ४३४— चाँदाका लोरकसे अनुरोध ४३५—लोरकका उत्तर; ४३६—हरदीसे चलकर गोवरके निकट पहुँचना ४३७—गोबर नगरमें आतंक। मैनाकी परीक्षा— ४३८—मैनाका लोरकके आनेका स्वप्न देखना ४३९—लोरकका फूलके हाथ मालीको मैनाके पास भेजना ४४०—मैनाका रोकर अपनी अवस्था कहना ४४१—मालीका उत्तर, ४४२—मैनाका दूध बेंचते हुए लोरकके पड़ावपर जाना ४४३—लोरकका दूध खरीदकर दाम देना; ४४४—मैनाको रोककर छेड़खानी करना ४४५—मैनाका अपनी स्थिति कहना ४४६—दूसरे दिन मैनाका फिर लोरकके पड़ावमें आना; ४४७—चाँदाका मैनासे अपनी बड़ाई करना ४४८—मैना का शृंगार करना। लोरकका घर आना— ४४९—लोरकका अपने आनेकी सूचना घर भेजना। ४५०—घर आकर माँके पैर पड़ना ४५१-४५२—माँसे घरकी अवस्था पूछना। (आगे का कथा अप्राप्य है।)