भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 104, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 104

८१ १ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) पहिले गावउँ सिरजनहारा । जिन सिरजा इह देषस यपारा ॥१ सिरजसि धरती और अकासू । सिरजसि मेरु मँदर कबिलासू ॥२ सिरजसि चाँद सुरुज उजियारा । सिरजसि सरग नखत का मारा ॥३ सिरजसि छाँह सीउ औ घूपा । सिरजसि फिरतन और सरूपा ॥४ सिरजसि मेघ पवन अँधकारा । सिरजसि बीजु करै चमकारा ॥५ बाफर सबै पिरिथिमी, कहेउँ एक सो गाइ ॥६ हिय पषरै मन हुलसै, दूसर चित न समाइ ॥७ टिप्पणी-(१) सिरजनहारा-सृष्टिकर्त्ता, ईश्वर । यपारा-वायु । (२) मेरु-सुमेरु पर्वत । मँदर-मन्दराचल । कबिलास-(कैलास> कब्लास>कबिलास (बकारका प्रक्षेप-कबिलास) कैलास पर्वत; ऊँचे महल और स्वर्गके अर्थमें भी जायसी आदिने कबिलासका प्रयोग किया है। (४) सीउ-शीत ! (५) अँधकारा-अन्धकार । बीजु-बिजली । ६ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) पुरुख एक सिरजसि उजियारा । नाँउ मुहम्मद जगत पियारा ॥१ तहिँ लगि सपै पिरिथिमी सिरी । औ तिह नाँउ मौनदी फिरी ॥२ टिप्पणी-(२) मौनदी-मुनादी; ढिंढोरा । ७ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) अबाबकर उमर उसमान, अली सिंघ ये चारि ॥६ ये निहचु कर बिज तिस, तुरहि झाले मारि ॥७ टिप्पणी-(१) मुहम्मद साहबके पश्चात् अबा बकर (अबू बकर) (६३२-६३४ ई ) उमर (६३४-६४४ ई ) अली (६४४-६५६ ई ) और उसमान ९