चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८२ (६३२-६६१ ई ) क्रमशः उनके उत्तराधिकारी खलीफ़ा हुए। ये चार यारक नामसे पुकारे जाते हैं। अबू बकर सिद्दीक (सत्यवादी) उमर फ़ारूक (न्यायी) उसमान विनम्र और अली आलिम (विद्वान) कहे जाते हैं। ८ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) साहि फिरोज दिल्ली बड़ राजा। छात पाट औ टोपी छाबा ॥१ एक पण्डित औ है पखिआहा। दान अपूरिस सराहै काहा ॥२ टिप्पणी-(१) फिरोजशाह-फीरोजशाह तुगलकवंशीय दिल्ली सुल्तान गयासुद्दीन तुगलकके छोटे भ्राता रजबका पुत्र और मुहम्मद तुगलकका चचेरा भाई था। मुहम्मद तुगलककी मृत्युके पश्चात् वह २३ मार्च १३५१ ई को सुल्तान घोषित किया गया और ३७ वर्षतक शासन करनेके पश्चात् २१ सितम्बर १३८८ ई को उसकी मृत्यु हुई। उसके समयमें प्रजा अपेक्षाकृत सुखी और समृद्धिपूण थी। छात-छत्र। पाट (त पट्ट) - राजपाट सिंहासन। टोपी-मुकुट। छाबा- (प्रा काच्छादेण कृञ्ज) सुशोभित होना । ९ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) सेख जैनदी हौ पखिलाना। धरम पन्थ सिंह पाप गँवाना ॥१ पाप दीन्ह मैं गाँग बहाई। धरम नाव हौ सीन्द चढ़ाई ॥२ टिप्पणी-(१) संख जैनदी- शेख जैनुद्दीन सुप्रसिद्ध चिश्ती सन्त हजरत नसीरुद्दीन महमूद लखमी 'चिराग ए-दिल्ही' की बड़ी बहनके बेटे थे। बड़ी बहनके बेटे होनेके साथ साथ वे उनके शिष्य और साहिबे पाख (मुख्य लेखक) भी थे। ११ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) खानजहाँ घरि जुग जुग खानी। अति नागर गुनबन्त बिनानी ॥१ चतुर सुजान मारु सब जाना। रूपवन्त मन्तरी सुखाना ॥२