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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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८४ दारिउँ दाख बहुत लै लाई। नारिंग हरिफ फरै न आई ॥३ कटहर तार फरे अभिरामा। जामुन के गिनती को जाना ॥४ [ ]। [ ]॥५ बाँस खजूर बर पीपरा, बैंबिली भई सेबार ॥६ राय महर कै बारी, देखत होइ अँधियार ॥७ टिप्पणी—(१) गोवर—दौलतक़ाज़ीने अपने सति मयना उ कोर-चन्द्राउनीमें इसका नाम गोहारि दिया है। उसकी विवेचना करते हुए हरिनारायण द्विवेदीने उसे ग्वालियर बतानेका प्रयत्न किया है (साधन कृत मैना सत पृ १११-११४)। किन्तु गोवर अगर ग्वालियरसे सर्वथा भिन्न था यह छिताईवार्ताके साक्ष्यसे सिद्ध है। अगरचन्द नाहटाको इसकी जो प्रति मिली है उसमें देवनन्दनने दामोदरका परिचय देते हुए उनका जन्मस्थान गोवर बताया है (कायस्थया दामोदरौ आता। गोवर गिरी तिनकी उत्पाता ॥) और अपने जन्मस्थानके रूपमें ग्वालियरका नाम लिया है (देवीसुत कवि विठलनडु माउ। जन्म भूमि गोपाचल गाऊं ॥)। लोक-कथाओंमें इसका नाम गौर या गौराके रूपमें आता है। सतीशचन्द्रदासका कहना है कि यह मालदा जिले (बंगाल) में है। (जर्नल आव द मिक्किक सोसाइटी खण्ड २५, पृ १२२)। सत्यव्रत सिन्हाने लिखा है कि बिहारके शाहाबाद जिलेमें डुमराँव तहसीलमें गठरा नामक ग्राममें अहीरोंकी एक बहुत बड़ी बस्ती है। लोरिकीके गायकसे यह ज्ञात हुआ कि लोरिक इसी गठराका रहनेवाला था। अहीरों की बड़ी बस्ती से हम यह अनुमान कर सकते हैं कि लोरिकका स्थान वही है (भोजपुरी लोकगाथा पृ १२)। प्रस्तुत काव्यमें जो भौगोलिक सूत्र उप- लब्ध हैं उनसे ज्ञात होता है कि गोवर गंगा नदीसे बहुत दूर न रहा होगा। गोवर के निकट देवहा नदी होने का पता भी इस काव्यमें मिलता है। देवहा नदीकी पहचान होनेपर इस स्थानका निश्चय अधिक प्रामाणिकतासे किया जा सकेगा। अभी इसके सम्बन्धमें इतना ही कहा जा सकता है कि यह गंगाके मैदानमें पूर्वी उत्तरप्रदेश अथवा बिहारमें कहीं रहा होगा। कूप—कूप। बाई—बापी। अँवराउँ—आम्राराम; आम का बगीचा। (२) गौवा—(सं गुवाक) एक प्रकारकी सुपारी। करिवर—नारियल। (३) दारिउँ—दाड़िम, अनार। दाख—अंगूर। (४) कटहर—कटहल। तार—ताड़।