चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१ २६ ( रौकेन्स ० ) सिफत बहके-बाहर बस वस्ना महल्ल दरत्रों शाहरे-मज़कूर ( उक्त नगरके निवासियोँका वर्णन ) बाँभन खत्री बसहिं गुबारा । गहरवार औ आगरवारा ॥१ बसहिं तिवारी औ पचवानौं । घागर धूनी औ इजमानौं ॥२ बसहिं गँधाई औ बनजारा । सात सरावग औ बनवारा ॥३ सोनी बसहिं सुनार बिनानी । राउत लोग बिसाती आनी ॥४ ठाकुर बहुत बसहिं चौहानों । परजा पौनि गनति को जानौं ॥५ बहुत आस दरभर अधह, खोरहिं डीढ न बाइ ।६ सँस पा देस गोवर, मानुस चलत भुलाइ ॥७ टिप्पणी-(१) बाँभन-ब्राह्मण । खतरी-खत्री अथवा क्षत्रिय । गुबारा-आभीर अहीर । गहरवार-गहड़वाल राजपूतोंका एक वर्ग । आगरवारा- अग्रवाल वैश्योंका एक प्रमुख वर्ग । (२) तिवारी-त्रिपाठी ब्राह्मणोंका एक वर्ग । पचवानौँ-पंचम वर्ण । घागर-निम्न वर्गकी एक जाति जिनकी स्त्रियाँ जन्मके अनन्तर शिशुके नाल काटने और सूतिका-गृहके अन्य काम करती थीं । इजमानौं-इमाम, साहु । (३) गँधाई-गन्धी, तैल सुगन्धितका काम करनेवाले । बनजारा- ( स वाणिज्यारक > बाणिज्जारक ) व्यापारी, यह सार्थवाह शब्दका मध्यकालीन पर्यायवाची था और इसका प्रयोग उन व्यापारियोंके लिए किया जाता था जो टाँड लाद कर ( सामूहिक रूपसे माल लाद कर ) दूर देशोंसे व्यापार करने जाया करते थे । सरावग-( स श्रावक ) जैन धर्मावलम्बी गृहस्थ । बनवारा- बरणवाल वैश्योंकी एक जाति पनवारा पाठ भी सम्भव । उस समय इसका अर्थ होता-पानवाला बरई । (४) सोनी-सोनेका काम करनेवाले । बिनानी-विज्ञानी । राउत- ( स -राजपुत्र > राउत > राउत् > राउत ) राजपूतोंका वर्ग विशेष मूलतः यह राजघरौँसे सम्बन्ध रखनेवाले लोगोंकी उपाधि थी । बिसाती-फेरी लगाकर बेचनेवाले व्यापारी ।