चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१ (५) वरउत—सगाई पक्का करनेके निमित्त आनेवाले नाई और ब्राह्मण । (६) जोगहि—योग्य यह संबंधोंमें प्रयुक्त। कासों—किससे। ३७ (रीडिंग्स १०) पुरिखास्तने राव जीत भौमन व हुज्जाम रा बर महर बराये पैगाम बाबन रो ( राव जीतका बाबनके विवाहके सन्देशके साथ नाई और ब्राह्मणको भेजना ) चौथें बरिस धरसि जो पाऊ । जीत बुलावा बाँभन नाऊ ॥१ दीन्हि बिसारी मोतिन्ह हारू । कहहु महर सों मोर जुहारू ॥२ औ अस कहहु मोर तूँ माई । राजा नीके करहु सगाई ॥३ औ तस बान कहसि सँवारी । वइसन बर पर सुनी सँकारी ॥४ महर कहसि को मुँहि पै आजू । हम चाहत इहि आपन काजू ॥५ इत कहि के बाँभन नाऊ, दोऊ दीन्हि चलाइ ।६ बरै चाँद पायन फँह, बेग कहत मुँहि आइ ॥७ टिप्पणी—(१) जीत—चेत पाठ भी सम्भव है। (२) जुहार—प्रणाम । (३) अस—ऐसा । मोर—मेरा । नीके--अच्छे । (४) तस—तैसा । वइसन—वैसा । ३८ (रीडिंग्स १८) बामदन दर्रब्मन व हज्जाम बर महर व अर्ज कर्बने पैगामे बाबन ( ब्राह्मण और नाईका महरके पास आकर बाबनका सन्देशा कहना ) बाँभन नाऊ गय सिंहवारू । देख महर दुहुँ कीन्हि जुहारू ॥१ महर कहा कित पठि आवा । औहन लहि मौधारी पावा ॥२ सुनहु देव मम जीत पठाई । धरम लाग बिनन्ते आई ॥३ उठो आइ तुम्हारेउ भाई । रामा नीक करहु सगाई ॥४ धरमराम तुम जुग जुग पावहु । हम दिये कर बोल सुनावहु ॥५