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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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९९ अगिन घरफ मा चाँदा, अरकत छुई न जाइ ॥६ जस उजियारैं भुनगा, मरहिं राइ अवाइ ॥७ टिप्पणी—(१) निउता—न्योता निमन्त्रित किया । (३) सात—साठ पाठ भी सम्भव है । (४) पुरान—यहाँ तात्पर्य ज्योतिष ग्रन्थोंसे है । इसका प्रयोग जायसीने भी इसी अर्थमे किया है (५२।२) । रासि—राशि । सुभ—शुभ । दीठी—देखा । (५) भुनगा—दीपक पर मँडरानेवाला कीट, पतंग । ३६ ( रीलेण्ड्स १६ ) सिफ़ते जमाले सूरते चाँदा बरहम शहरा मुन्तशिर शुद ( समस्त नगरोंमें चाँदाके सौन्दर्यकी चर्चा ) बरहें माँस [प्र*]गटी बाता । घौरसमुँद माबर गुजराता ॥१ तिरहुत अठम बदाऊँ जानी । चहूँ भुवन अस बात बखानी ॥२ गोबरहि आइ महर कै धिया । चाँद नाउ धौराहर दिया ॥३ अस तिरिया जो माँगि पाई । अरु तिहि लाइके पियाहिं जाइ ॥४ राजा के नित परठत आवैहिं । फिरि जाहिं पै उत्तर न पावैहिं ॥५ महर कहै को मारै जोगहि, फासों करतौं पियारु ।६ तकतैं पितत सभन्को आहँ, बात न देखतौं काहु ॥७ टिप्पणी—(१) बरहें—बारहवें । घोरसमुद—द्वारसमुद्र द्वारसमुद्र, दक्षिणमें बेलूरसे आठ मील उत्तर-पश्चिम स्थित सुप्रसिद्ध नगर, जो १०६२ ई से होयसलोंकी राजधानी थी । माबर—दक्षिण पूर्वी तटवर्ती भाग जो प्राचीनकालमें चोलमण्डल और आजकल कारोमण्डल कहलाता है; दूसरे शब्दोंमें मद्राससे लेकर तिन्नेवेली तक विस्तृत प्रदेश । तिरहुत—तीरभुक्ति, बिहारका मैथिल प्रदेश । (२) अठम—अष्टम । बदायूँ—उत्तर प्रदेशका एक मुख्य नगर जो दिल्ली सुल्तानोंके शासनकालमें अपना विशेष महत्व रखता था । (३) धिया—धी, पुत्री । (४) तिरिया—स्त्री, नारी ।