चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५८ ३३ ( रीकेण्ड्स १३ ) तबल्लुद शुदने चाँदा दर खान-ए महर व शिकस्त्ये कदने हमों सितारग्यान ( महरके घर चाँदाका जन्म और ज्योतिषियोंकी भविष्यवाणी ) सहदेव मंदिर चाँद औतारी। धरती सरग भइ उजियारी ॥१ भले घरें भयउ औतारू। दूज क चाँद आन सयँसारू ॥२ साठो चँदर नखत भा माँगा। आनौं सूर दिपै जिह आँगा ॥३ भय सपूरन चौदस राती। चाँद महर धी पदुमिनि जाती ॥४ राहु केतु दाइ सेउ गराहीं। सूक सनीचर पहिरें घाहीं ॥५ और नखत अरुझठें, आवैंहि पँवर दुआर ॥ चाँद लखत नर माइहिं, जगत भयउ उजियार ॥७ टिप्पणी—(५) सेउ—सवा अधिक बड़े । गराहैं—ग्रह । 'सेउ करावैं' भी पढ़ा जा सकता है । उस अवस्था में अथ होगा—सेवा करते हैं । ३४ ( बीकानेर प्रतिके अप्रक्षिप्त पाठ से ) चाँद सुरूज तेहि निरमरा, सहदेव गिनी जुवारि ॥६ गन गंधर्ब रिसि देवता, देखि बिमोहे नारि ॥७ टिप्पणी—(७) गन गंधर्ब—गन्धर्व समूह । यह पूरी पंक्ति १५वें कड़वकमें भी है। ३५ ( रीकेंड्स १५ ) रोशे पन्जुमें शश्ती शब ज्याफते खान्दा करदन व दीदन कुन्वारहारों ताले ( पाँचवें दिन रात्रिमें भोज और ब्राह्मणोंका कुण्डली देखना ) पाँचौँ दिवस छठी भइ राती। लिउवा गोबर छतीसो जाती ॥१ घर घर भम कर निठता आवा। औ तिह ऊपर बाज बधावा ॥२ महरें सहस सात एक जाये। अग मूड सेंदुर अन्हवाये ॥३ बाँभन सभा आइ जो भईती। छांड़ि पुरान रासि गुन दीठी ॥४ छठी का आखर देखि लिखारा। अब एहि सों जाइ जिंवाय ॥५