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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१७ सोन रूप भल (अमरन) आई । दिन-दिन पहिरहु चीर धोआई ॥४ जौँलहि भाषन होइ सँओगा । पान फूल रस फरिदै भोगा ॥५ ओ तुम्ह रापि महर के बेटी, अजहुँ हूर न लआइ ।६ ताथ दूध अनटहु, रहि चाँदा पीय मिलाइ ॥७ मूल पाठ—४ म० फिर पहिर म भल फिर-फिर आइ है। पर इनमें से कोई भी प्रसंग संगत पाठ नहीं है । हमारी समझमे मूल पाठ अमरन रहा होगा । जान पडता है लिपिक आरम्भका अधिक और अन्तका भून लिखना भूल और बीजके भरको दो बार लिख गया है । टिप्पणी—(१) साटू—सत्तू भुने हुए चने, जौ, मटर आदि का मिश्रित आटा जिसे पानीमें घोल अथवा सान कर नमक अथवा शकर मिला कर खाया जाता है । यह पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहारके लोक-जीवन में बहु प्रचलित भोजन है । (६) हूर—हुड़ । (७) ताथ—गर्म । ४८ (रौकंग्धूम २८) जवाब दादने चाँदा बर ससुअ रा (चाँदाका सासको उत्तर ) तुम्ह हूँ सास अतहिँ गँवानी । राखहु दूध पियायहु पानी ॥१ दही न देइ खाँउ जिहँ लाइ । महरँ कै हौँ परी अदाइ ॥२ सोन रूप का हमरे नाहीं । अनौँ सइज जेउनारहि खाहीं ॥३ तुम्हरे घी जो सीरै थाहा । पीठ न पूँछत पोलहु फाहा ॥४ अबलहि पैँ हुर आपन घरा । काम लुपुध बिरहूँ धन जरा ॥५ निसि अँधियार नीर घन, पीज लबइ सुँइ लागि ।६ सेज अकेलि फाटि मोरि हिरदै, ओ जो देउतँ जागि ॥७