भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 138, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 138

११ बस मँछरी देखी बिनु पानी । (तरपत) महरैं रैन बिहानी ॥२ मानु सँझान न कीत बयारू । फैँसँ आइ सो चाँद दुलारू ॥३ देत सुखासन चले फहारा । नाती पूत भये असवारा ॥४ घानुक पाँयक आगे पैठे । जीस महर के पाखर फेते ॥५ फाड़ि चाँद बैसार सुखासन, तुरत बेग लै आइ ।६ बरनी होइ महर गँ, चूँय चाँद के पाइ ॥७ मूलपाठ—२-बिठव । टिप्पणी—(१) बी—दावाग्नि । (३) मानु—सूत । सँझान—अस्त हुए । कीत—किया । बयारू—व्यालू, रात्रिका भोजन । (४) सुखासन—पाल्की । ५२ ( रीफैन्ड्स ३१ ) आमदने चाँदा दर खानये मादर व पिदर व रसीदन सहलियान चाँदा रा ( चाँदाका मैके आना और सहेलियोंसे भेंट ) फूँकैँ मरद् चाँद अन्हवाए । सेंदुरी चीर फाड़ि पहराए ॥१ माँग चीर सिर सेंदुर (पूरी) । जानहु चाँद फर आँतरी ॥२ सखी सहेलिन देखन आईं । हँस हँस चाँद बहिरि फलाई ॥३ सेज पिरम रस मनिज सुहागू । पिरत पियाग भुगति कस भागू ॥४ अब पैठि देखहुँ बिह पासा । कहँहु चाँद कस कीन्ह पिलासा ॥५ चाँद सहेलिन पूँछि रस, धौरहरों लाइ ।६ सीव आइ जिनु मरु, फहु फैंसे रैन बिहाइ ॥७ मूलपाठ—२-पूय । टिप्पणी—(२) सेंदुर पूरी—माँगमें सेंदुर भरनेको स्त्रियों सेंदुर पूरना कहती हैं। ५३ ( रीफैन्ड्स ३२ ) जबाब दादन चाँदा बा सहलियाने खुद चहार माहे जमिस्ता ( चाँदाका सहेलियोंको उत्तर—जाड़ेके चार मासका वर्णन ) जस तुम्ह पूछहु रस हौँ कहा । डर कँ फान लजाती अहाँ ॥१