चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमाह माँस मो यों धुँधुवाई। लागी सीउ न पीउ तन आइ ॥२ रैन अमासी परी तुसारू। हियें अँगीठी धरा सरारू ॥३ बिरहिन नैन न आग बुझायी। सौर-सुपेती जाड़ न जायी ॥४ अस कै सखी बिगोवउ नाहीं। सेज भई निसि जलहर माँहीं ॥५ अस बरै दह मारे, हींठँ सरहि सुखाइ ।६ पिउ बिरहैं मोर जोबन, फुल जैस कुँभलाइ ॥७ टिप्पणी—(४) सौर-सुपेती—बिछौना बिस्तर। ५४ (पंजाब [प]) बैसियत कदन बाँद पियक माह फागुन पेख सहेन्दिान बुझाइ घोहर (चाँदा का सहेलियों से फागुण मास में पति-विरह की स्थिति का वर्णन करना) कहौं सखी माह माँस कै बाता। फरसि रांग सबै घनि राता ॥१ कर गहि गरौं कन्त ले लावइँ। उठ कै पिया सखि सेज बिछावइँ ॥२ तिल दिन भाइ होइ तिलखानी। हौं तिल एक पिय संग न खानी ॥३ रैन डरावन बराबर फारी। घट न आवइ बजर कै भारी ॥४ जागत लोयन आधी राती। पहरेबर पिउ घर सरसहिं राती ॥५ रैन तुसार जनु फट्ठु घोरों, रहीं भू पर गिय लाइ ।६ सौर सुपेती कन्त बिनु, तिल एक बाँभ न जाइ ॥७ टिप्पणी—शीर्षक में फाल्गुन मास का उल्लेख है। कड़बक में माघ मास का वर्णन है। (१) माह—माघ। ५५ (पंजाब [क]) (फाल्गुन कथन) फागुन पवन झरहिं बन पाता। रोलहिं फाग जिह घर पिउ (राता०) ॥१ फूल सुहावा कूंज औ करनाँ। बबुल बइठ देखि हइ बरनाँ ॥२