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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१११ सुन्दर फागुन [- -] री । केस सिंगार क [ --- -] ॥३ जिह रस दीस बन फूले टेसू । हाँ पी पिन भइ डाखन मेसू ॥४ [ ] । [ ] ॥५ [ ] ।६ [ ] ।७ टिप्पणी—उपलब्ध फोटो में शीर्षक और अन्तिम तीन पंक्तियाँ नहीं आयी हैं। तीसरी पंक्ति भी अत्यन्त अस्पष्ट है। (१) फागुन पवन—पगुनावट; यह बहुत तेज और बरफीली होती है। (२) कूब—इसे फारसी में कूजा कहते हैं। आइने अकबरी में इसे गुलाब के आकृति का फूल कहा गया है। सम्भवत यह मोतिया या बेले का ही पारसी नाम है। करना (सं कर्ण)—मोनियर विलियम्स के संस्कृत कोष के अनुसार कण अमलतास और आक (मदार) के पुष्प को कहते हैं। हिन्दी शब्द सागर में इसे केवड़े की तरह लम्बे किन्तु बिना काँटोंवाला पौधा कहा गया है और पवाड़ रूपमें सुगन्धित का उल्लेख है। आइने अकबरी के फूलों की सूची में इसे वसन्त में फूलनेवाला सफेद फूल बताया गया है। ५६ (पंथाय [प]) ( चैत बजन ) चैत नाँग सब क [ ] ५ । [ ] वर होइ सुई [ ] ॥१ जोइ कहीं सब जग होली । [ ] धरती फूली ॥२ नौ खंड फूले फूल सुहाए । [ ] ॥३ ससी बसन्त सब देख [ ] । [ - ] ॥४ डींडर बैस बैसन्दर जरै । [ - -- ] ॥५ [ - - - - ] ।६ [ - ] ।७ टिप्पणी—यह पृष्ठ अत्यन्त जीर्ण अवस्था में है। इसका अधिकांश अंश गायब है। जो बचा है वह भी उपलब्ध फोटो में अत्यन्त अस्पष्ट है। अतः यहाँ कुछ अनुमानतः पढ़ा या बैठा दिया गया है। पर इसे एक सामान्य वाचन ही मानना चाहिये।