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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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उन्होंने अपने सूत्रसे ज्ञात ईस्वी सन् को विक्रमी संवत् मान लिया । इस विक्रम संवत्‌के साथ खुसरोकी कल्पना सहज ही है । रामकुमार वर्मा की तिथि १३७५ भी वस्तुतः विक्रमी संवत् न होकर ईस्वी सन् ही है । ईस्वी सन्‌के रूपमें मिश्रबन्धुकी तिथि १३८५ और रामकुमार वर्माकी तिथि १३७५, दोनों ही फीरोज़शाह तुगलकके समय और जौनाशाहके मन्त्रित्वकालमें पड़ते हैं । फिर भी जैसा कि हम आगे देखेंगे, ये दोनों ही तिथियाँ वास्तविक रचना तिथिसे थोड़ी भिन्न हैं । दाऊद फीरोज़शाह तुगलकके समय हुए थे, यह तथ्य गुप्तदासबके माध्यमसे ब्रजरत्नदास द्वारा प्रकाशनमें लाये जानेके पूर्व भी कुछ लोगोंको ज्ञात था । उत्तर प्रदेशके प्रादेशिक गजेटियरोंके प्रणेताओने इस बातका स्पष्ट उल्लेख किया है किन्तु हमारे अनुसन्धित्सुओंका ध्यान उस ओर जा ही नहीं सका । रायबरेली जिलेके गजेटियरमें डलमऊनगरके इतिहासके प्रसंगमें कहा गया है कि अल्तमशके शासन- कालमें इस नगर (डलमऊ) ने समृद्धि प्राप्त की । उसके समयमें यहाँ मखदूम बदरुद्दीन रहा करते थे । तत्पश्चात् फीरोज़शाह तुगलकके समय तक उन्नति पर था । उसने जनतामें मुस्लिम सिद्धांतोंके प्रसारके नियमित यहाँ एक विद्यालय स्थापित किया था । इस विद्यालयकी उपयोगिताका अनुमान डलमऊ निवासी मुल्ला दाऊद द्वारा सम्पादित 'चन्दैनी' नामक भाषा पुस्तकको देखकर किया जा सकता है ।१ अवधके प्रादेशिक गजेटियरम भी यही बात इन शब्दोंमें कही गयी है—फीरोज़शाह तुगलकने यहाँ (डलमऊ) मुसलिम धर्म और विद्याके अध्ययनके लिए एक विद्यालयकी स्थापना की । इसकी उपयोगिता इस बातसे प्रकट है कि डलमऊके मुल्ला दाऊद नामक कवि ने ७७९ हिजरीमें भाषामें 'चन्दैनी' नामक ग्रन्थका सम्पादन किया ।२ १९४४ ई में श्यामसुन्दरदासके हिन्दी साहित्य का तृतीय परिवर्द्धित संस्करण प्रकाशित हुआ । उसमें उन्होंने दाऊद और चन्दायनकी चर्चा संक्षेपमें की है; पर उसमें कोई उल्लेखनीय सूचना नहीं है । सं २ ० (१९५१ ई )में परशुराम चतुर्वेदीने सूफ़ी प्रेम-काव्योंके अवतरणोंका संग्रह सूफी-काव्य-संग्रहके नामसे प्रस्तुत किया । इसमें दाऊदके सम्बन्धमें कुछ पंक्तियाँ हैं जो अपने आपमें मनोरंजक हैं । उन्होंने लिखा—इस रचनाका सर्वप्रथम उल्लेख हि० सम् ७७२ (सं० १४२७) में अर्थात् फिरोज शाह तुगलकके शासनकाल (संवत १४०८ १४४५) में हुआ है । डाक्टर रामकुमार वर्मांने दाऊदको अलाउद्दीन खिलजी (राज्यकाल सं० १३५२ १३७३) का समकालीन समझा है और उनकी कविता काल सं० १३७५ ठहराया है, जो अनुचित नहीं कहा जा सकता । जान पड़ता है कि मुल्ला दाऊद इस प्रकार अमीर खुसरोका भी समकालीन था । मुल्ला दाऊदके सम्बन्धमें यह पता नहीं चलता कि उसका हिन्दवी रूप क्या १ डिस्ट्रिक्ट गजेटियर आव द यूनाइटेड प्राविन्सेज भाग ३९, रायबरेली पृ १९१ । २ गजेटियर आव द प्राविन्स आव अवध भाग १,पृ ३५५ ।