भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 143, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 143

११४ ६९ (रिफेरन्स १०) इस्तरहाम नमूदन् बाज़िर पेश गुन्दए शहरे गोबर (गोबरवासियोंस बाज़िरका प्रश्न) हौं मारेउँ ईंह गोब तुम्हार। नैन बान हस गयी बिसारे ॥१ रकत न आवा दीस न घाऊ। हियें साल मोर उठै न पाऊ ॥२ कितैं मैं देख पराहेर ठाढ़ी। इत नैन जिउ लै गइ काढ़ी ॥३ कौन बनिज मोर आगें आवा। लाभ न बिसुवा मूर गँवावा ॥४ हौं तुम कहेउँ बोल पतियाहू। जे मारेउँ सिद्धि कहू न काहू ॥५ पूछि देखि विह पामल, रात पीर जो आग। ६ गयो सो जान जिन्ह मेला, फँसो जान बिष लाग ॥७ टिप्पणी—(१) बिसारे—विषाक्त। ७० (रिफेरन्स १) गुरीख्तने बाज़िर अज शहर गोबर बेखौफे राव महर (राव महरके भयस बाज़िरका गोबर नगर छोड़कर भागना) बाज़िर देखि मीचु मोर आइ। गोबर तजि हौं बाँउ पराई ॥१ कहा दीप महँ नींद न (आवइ)। भूख गयी अन-पानि न भावइ ॥२ जो सो तिरी फिर दिखरायइ। चौहट मीचु नियर होइ आवइ॥३ महर पास जो कहि फोठ खाई। खिन एक भीतर खाल भड़ाई ॥४ बिधना क कहा भिमस्तैं कीन्हा। आनै बाँध कर सास्तो दीन्हा ॥५ चला छाड़ि कै बाज़िर, बसा ओर ठहँ जाइ। ६ बाँद रहे मन भीतर, सँभर सँभर पछताइ ॥७ मूल पाठ—२-भावा। टिप्पणी—(१) मीचु—मृत्यु। (२) अन पानि—अन्न-पानी खाना पीना।

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक) · पृष्ठ 143, कुल 520 में से · BharatKosha