चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६६ (६) इहँ—ठौर, जगह । (७) सँभार-सँभार—स्मरण कर करके । ७१ ( रीडैन्ट्स ३८ ) रसीदन बाज़िर दर शहर व सुरुद कर्दने बाज़िर अन्दर शब व शुनीदने शब बज बाम ( बाज़िरका एक नगरमें जाकर रातको गाना और छतपरसे राजाका सुनना ) एक खूँड छाड़ आन खूँड जाई । माँस एक बाज़िर पाट घटाई ॥१ पुनि ओ आइ मयठ पैसारा । पैठि पौंरिया नगर दुआरा ॥२ बात भूझ सब लेतस नाऊँ । भीख माँग खाओं इँह गाँऊँ ॥३ राइ रूपचंद भाँठ सरेखा । नगर राज फिर बाज़िर देखा ॥४ दिवस गयो निसि मयठ उझेरा । बाज़िर फिर कर लेस बसेरा ॥५ तिहँ रात सुहावन, बाज़िर ठोका तार ।६ गाइ गीत चंद्रावल, नगर मयठ झनकार ॥७ टिप्पणी—खूँड—खण्ड देश-विभाग । ७२ ( रीडैन्ट्स ३९ ) दर रोज तलबक्रीदन शब बाज़िर रा व पुरसीदन कैफियते सुरुदे शब ( दूसरे दिन राजाका बाज़िरको बुलवाकर गानेका कारण पूछना ) दिन भा रावँ भाँठ भुलावा । आज रात निसईं कँ गावा ॥१ भाँठ कहा इँहमों क न होई । होइ रजायसु आनौं सोई ॥२ चहुँ दिसि भाँठै वन दौराये । बाज़िर हेर तोह ले आये ॥३ पूछा राउ कौन तोर ठाऊँ । सुर कण्ठ विह दीन्हि गुसाऊँ ॥४ आज रात निसईं तैं गावा । चंद्रावल मन रहराँ लाभा ॥५ गीत नाद सुर कबिस बखानी, कथा कहु गायनहार ।६ मोर मन रैन देवस सुरउ राउ, भूँजसु गाउँ गिसदार ॥७