चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२६ टिप्पणी—(२) इहवाँ—यहाँ । रचाबसु—राज्यादेश । आऔं—ले आऊँ । (३) हेर टोह—ढूँढ़-खोज कर । (७) पिवहार—गीतकार, गायक । ७३ ( रीडिंग्स ४ ) हिकायते दीदने चाँदा बयान करदन पेश राव रूपचन्द (राव रूपचन्दके सम्मुख चाँदाके दर्शनका उल्लेख) सुपन क सुनाँ कहउँ हौं काहा । बोलेउँ सोइ जो देखेउँ आहा ॥१ नगर उजैन मोर अस्मानू । विकराजित राजा घरमानू ॥२ चारिउँ भुवन फिरत हौं आवा । गोवर देखेउँ नगर सुहावा ॥३ विहवाँ चाँद तिरि मैं देखी । पायर खीर अहस चित पैठी ॥४ मनहुत अइसहिं मेट न जाई । दिन-दिन होइ अधिक सवाई ॥५ सहदेव महर कर धिय चाँदा, चहुँ भुवन उजियार ।६ मानिक जोत आन बर जरैहि, नागर चतुर अपार ॥७ ७४ (रीडिंग्स ४१ ; बम्बई ६) आशिक शुदने राव बर नामे चाँदा व अस्म बखशीदन बासिर रा (चाँदाका नाम सुनकर रावका आसक्त होना और बासिरको घोड़ा देना) सुन कै चाँद राउ अँगरानाँ । बासिर उभत' नीर ढर आनाँ ॥१ जसको सूत बैठि' उठि बागी । राजा हियँ घटपटी लागी ॥२ जुरी दइ बाजिर कहुँ आनी' । पीठ घाल पाखर सनबानी' ॥३ बासिर कौन देस सो नारी । ठौर कहहु बरु तुमहि बिचारी' ॥४ करन कहत भौ लखन बिसेखी । अछरं रूप सो तिरिया देखी ॥५ मारग कौन फैस बैठारा, साँध छोट कस आह ।६ सहज सिंगार भोग रस, पिंडक, पराक्रम कै चाहि' ॥७