चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—शुनीदने राब रूपचन्द नामे चाँदा व पुरसीदने बाज़िर रा सूरते जेबाइये ऊ (चाँदाका नाम सुनकर राय रूपचन्दकी बाज़िरसे उसके सौन्दर्यके प्रति जिज्ञासा )। १—अहत । २—कोइ । ३—गैल । ४—भानीं । ५—सनबानी । ६—गाँठ कहउ अब ठाँठ बिचारी । ७—करन कहि ओ करन बितेगी । ८—कौन । —रूप । १ —कस ताह । टिप्पणी—(१) चटपटी—छटपटी, उत्सुकता । (३) तुरी—(सं तुरंग>तुरग>तुरीय>तुरी) घोड़ा । पाखर = पख्खर, कवच । (५) बितेगी—बिछोह । बजर—अप्सरा । (७) पिंइक—पिण्ड शरीर । पराक्रित—प्रकृति, स्वभाव । ७५ ( रीट्सूक्स ४१ ) सिफ़ते फर्के चाँदा गुफ़्तन बाज़िर बर राव रूपचन्द ( राय रूपचन्दसे बाज़िरका चाँदाके माँगका वर्णन ) पहले माँग क कहउँ सोहागू । तिहिं राता जग खेलै फागू ॥१ माँग चीर सर मेंदुर पूरा । रंग चला जनु फानफेजूरा ॥२ दिया जोत रैन जस पारी । कारें सीस दीस रतनारी ॥३ म यह माँग चीर तर दीठी । उवत सूर जनु किरिन पइठी ॥४ माँथ पिराय जोत पँसारा । सगरै देस होइ उजियारा ॥५ राउ रूपचंद बोला, पुनि मई छाँड गाउ ।६ माँग सुनत मन राता, बाज़िर करब बिपाउ ॥७ टिप्पणी—(१) राता—अनुरक्त । (२) मेंदुर पूरा = माथे सिन्दूर भरनेको स्त्रियाँ सिन्दूर पूरना कहती हैं । फानकेजूरा—कनकधतूरा, धतूरा का एक अच्छा पौधा ।