भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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११८ ७६ (रौकेन्ड्स ७३) किस्तवे मुयेषा चौदा गोयद (केस वर्णन) भँवर बरन सो बेनी बारा। जनु बिसहर लर परे मॅडारा ॥१ लोंग फेन मुर [मूँध*] भराये। आनु सेंदुरी नाग सुहाये ॥२ बेनी गूंद जूहि जरमावइ। ल्हर चहहि बिस सतक दहावइ॥३ देखत बिस चढ़हि मंतर न माने। गारुर काइ अनारी जाने ॥४ जूड़ा छोर झार सो नारी। देवसहिँ रात होइ अँधियारी ॥५ डंक चढ़ा सुन राजा, परा लहर मुरझाइ ।६ बात कहत जिह बिस चढ़हि, गारुर काइ कराइ ॥७ टिप्पणी-(१) भँवर—भ्रमर, काला। बरन—वर्ण रंग। बारा—बाल केश। बिसहर—विषधर, सर्प। लर—लड़ लड़ी, पंक्ति। (२) सुर—मुंड मूँड सिर। (४) गारुर—विष वैद्य सर्प के विष को उतारने वाला। काइ—क्या। (५) जूड़ा—बँधे हुए केश। छोर—खोल कर। झार—झाड़। ७७ (रौकेन्ड्स ७४) सिफते पेशानी चौदा गोयद (ललाट वर्णन) देखि लिलार बिमोहे देवा। लोक सब कुटुंब कीनहिं सेवा ॥१ दूज क चाँद जानु परगासा। कै खर सोभन कसौटी कसा ॥२ बदन पसीज मूँद जो आवहिं। चाँद माँझ जनु नखत दिखावहिं ॥३ मुँह दप सोह न देखी जायी। सरग घूर जनु अवनल आयी ॥४ ससहर रूप भइ उठ रेखा। मैं न अकेलि सम जग देखा ॥५ मोर चड़ा बिस उतरा, रायँ करपट लेत ।६ सुन लिलार उठ बैठो, बाजिर कंचन देत ॥७