भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१२९ टिप्पणी—(१) छिकार—सलाह। (२) पर—पखरा, घुड़। सोवन—सुवर्ण, सोना। ७८ (रीडिंग्स ४५८) ( भौंह वर्णन ) भौंहैं धनुक जनु दुइ कर ताने । पंचबान गुन खींच सधाने ॥१ बान बिसार सान दइ सारइ । पारथ जेम अहेरै आवइ ॥२ अरजुन धनुक सरग में देखी । चाँद माँह गुन सोइ बिसेखी ॥३ सर तीखे जिन्ह मार फिरावइ । ठाँर परे सो येगि न जाघइ ॥४ चाँद माँह गुन ऐसें अहा । मूँड न डोल छु गाइ कहा ॥५ मन सिकार कैंद याजिर, धानुक भइ सो नारि ।६ मइझ मिरग भा राजा, मया मोह गमे बिसारि ॥७ टिप्पणी—(१) पंचबान—पंचशर, कामदेव। (२) बिसार—विषाक्त। सान—शान। दइ—देकर। पारथ—शिकारी। अहेरै—शिकार को। ७९ ( रीडिंग्स ४५९ ) जितने वरमहाय पाढा गोयद ( नेत्र वर्णन ) नैन सरूप मेत महँ कारे । रिउन बिनु घरन होंहि रतनारे ॥१ अम्प फार जनु मोतिन्ह भरे । से दइ भाँह कैं तर धरे ॥२ महझिडोलहि जानु मषुपिया । भै निमि पवन झकारें दिया ॥३ असन समुंद मानिक भर गह्र । गइ याफ घर गाँठ न गह्र ॥४ नैन समुंद अति अरगाहा । बूड़हिं राह न पावहिं पाहा ॥५ आँभर नैन चाँद यस आप, दीगर दिन माह ।६ मरग जापि थद दैमे, गजा पूछहु काह ॥७