चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२ ८० ( रौवैन्द्स ४६ ब ) सिफते बीनीये चाँदा गोयद ( नासिका वर्णन ) मुँह मँह नाक अइस क सिंगारू । जनु अमरन ऊपर कें हारू ॥१ सुवा नाक ओ लोग सराहा । विहु जाइ अधिक से आहा ॥२ सहज ऊँच पिरिव में सब खानौँ । भाँ सच साकर फरहूँ पखानौँ ॥३ तिलुकफूल अस फूल सुहावा । पदुमिनि नाक माठ वस पावा ॥४ नाक सरूप अइस मैं कहा । बानु धरग सोन कर महा ॥५ बेनाँ परिमल फूल कस्तूरी, सर्ब बास रस लेइ ।६ खिन मुरखि राठ रूपचंद, अरध दरभ सब दइ ॥७ टिप्पणी—(१) अइस—इस प्रकार । क—का । (२) सुवा—शुक तोता । (४) तिलुक—एक प्रकारका पुष्प । फूल—नाककी फुल्ली नाकमें पहननेका आभूषण । सम्भवतः साहित्यमें नाकके आभूषणका यह प्राचीनतम उल्लेख है । मुसलमानी शासनके आरम्भसे पूर्व नाकके किसी आभूषणकी चर्चा न तो किसी भारतीय साहित्यमें है और न कलामें ही उसका अंकन पाया जाता है । पदुमिनी—पद्मिनी व्यतिरी रानी । (६) बेना—सूस करन । परिमल—कई सुगन्धियोंको मिलाकर बनाई हुई बात विशेष । (७) अरथ—अर्थ । दरभ—द्रव्य धन । ८१ ( रौवैन्द्स ४६ ब ) सिफते लबहान चाँदा गोयद ( ओष्ठ वर्णन ) राधा ओ रत अधर निरासी । जनु मनुसैं कै रकत पिआसी ॥१ रुखौ दरेरैं दरेरैं सीखी । रकत पियइ मनुसैं गुन सीखी ॥२