चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२१ सहज रात बनु सुरंग पटोरी । और रंगरावी पान सुपारी ॥३ हार डोरिह विह रग राता । तिह रग वाजिर फही सो बाता ॥४ आन निरासा कस लै जीवा । खाँड आन सिह ऊपर पीवा ॥५ अस कै अचरें सुन कै, राजा भा मन मोर ।६ रकत घार तिह तँह, रस घर मारा जोर ॥७ ८२ ( रीकैन्स ३०७ ) सिकते दन्दान चाँदा गोयद ( दन्त वर्णन ) चौक भये पानहि रंग राता । अतरहिं लाग रहे जनु घाँता ॥१ अधर पहिर जो हँसे कुँवारी । बिजरी लाँक रैन अँधियारी ॥२ मुख भीतर दीसै उनियारा । हीरा दसन करहिं चमकारा ॥३ सोन खाप जानु गड़ घरे । जानु सूरुज कर कोठिला भरे ॥४ दारिउ दाँत देखि रस आसा । मैंबर पंख लागे जिहिं पासा ॥५ समझा राठ रूपचन्द, सुनिफे वचन सुहाठ ।६ भोजन जेवैंत राजहि, लाग दाँत कर घाउ ॥७ टिप्पणी—(१) चौक—(स चतुष्क) आगेके चार दाँत । घाँता—घाँत । (४) सोन—सोना सुवर्ण । खाप—हम्मी गुफ्ती । कोठिला—कोठार, अनाज रखनेका बड़ा पात्र या घर । (५) दारिउ—दाड़िम अनार । ८३ ( रीकैन्स ३०८ ) सिफते जुबाने चाँदा गोयद ( रसना वर्णन ) चाँद जीभ मुख अमरित पानी । पान फूल रस पिरम कहानी ॥१ पदुमनि वचन नीदि सुनि आवइ । दुख बरै सुख रैन बिहावइ ॥२ अमरित कुण्ड भयउ मुख नारी । सहज पात रस पहँ पौनारी ॥३