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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१२६ बाल रँगने आदिके काममें आती है। काँपर—चौडा, किन्तु कम गहरा कटोरेके आकारका पात्र, जो शुभ अवसरोंपर प्रयोग होता है। कान्यकुब्ज जातिमें इसका प्रयोग विशेष रूपसे कन्यादानके समय किया जाता है। (६) सुहारी—जिसे सामान्यतः पूड़ी (पूरी) कहते हैं वह अवध और भोजपुर में सोहारी कही जाती है। यहाँ उसी से तात्पर्य है। पर कहीं कहीं आटे को बेल कर धूप में सुखाने के पश्चात् घी में तली हुई पूरी को सोहारी कहते हैं। (७) अथथाह—अगाध ! ९० (रीडींग्स ५१अ) सिफते पुश्त बाँधा गोयद ( पीठ वर्णन ) पोरहिं पोर पीठ बैसारी। गढ़ी बनाई साँचे ढारी ॥१ कर धूर हीर पात क दोना। पीठ ठाँउ सहज दुइ मोना ॥२ लंक पार अस देइ न आवइ। बाँद धीर मँह मरम दिखावइ ॥३ परें लक घिसेहिं घनों। और टंक पाथर फर गुनों ॥४ फूँकहि टूट होई दुइ आधा। नैन देख मन उपजै साधा ॥५ मूरख होइ जो थर्र न आने, बाहै पथर्र पाठ ।६ कर गुन भये पीठ मा, कुइत फाड़ा राठ ॥७ ९१ (रीडींग्स ५१ ब ; पंजाब [कर] ) सिफते रानहा व रफ्तार बाँधा गोयद ( जानु एवं चाल वर्णन ) कदलि कम्म' दाइँ चीर पहिराये। चाँद चलन अपुरुष पर' शये ॥१ औ समताल दीख असि धारा'। दरउ विमोहेँ सरँग पँतारा ॥२ दहि कम्भ मार मन तस लागा। सरभै धरउँ धान कँ नाँगा ॥३