चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३ धारी रंगका रेशमी वस्त्र बताया है (कास्ट्यूम्स एण्ड टेक्सटाइल्स इन सल्तनत पीरियड पृ. ७१)। सम्भवतः उन्होंने यह अनुमान उसमें चौकट बांधी पहचानके आधारपर किया है। (बनारसकी बोलीमें सामान्यतः चौकट अखन्त जैसे वस्त्रको कहते हैं)। हमारा अनुमान है कि चरचा वही वस्त्र है जिसका उल्लेखने जीर्णज्वरपरिधानविधि नामक वर्णकमें परबया नामसे किया गया है। (वर्णरसमुच्चय, पृ. १८)। पन्नवस्त्र (सं. पत्रपट) किसी ऐसे वस्त्रका नाम होगा जिसपर पत्र अथवा फूल बना रहता रहा होगा। भोजनके समय पहननेके वस्त्रोंके रूपमें यह निस्सन्देह रेशमी रहा होगा। चीर—आइन-ए-अकबरीमें सोनेके काम किये हुए वस्त्रको चीर कहा गया है। चौकठिया—इसका उल्लेख पृथ्वीचन्द्रचरितमें भी हुआ है और सम्भवत इसीका उल्लेख वर्णकसमुच्चयमें चौऊपाचीवक रूपमें हुआ है। गुजरातीमें इसे चौंकडी कहते हैं। जान अर्विनने सत्रहवीं शतीके भारतीय वस्त्र व्यवसायका जो अध्ययन प्रस्तुत किया है उसमें उन्होंने 'से गस्ते रिसक्ता' चारचानेदार सूती कपड़ा बताया है। हो सकता है। यह उड़ीसामे बनने वाला रेशम और सूतमिश्रित वस्त्र हो जो चारखाना कहा जाता था (मोनोग्राफ आन सिल्क गुड्स बङ्गी, पृ. ९९)। (३) मुंगिया—इसके कई अर्थ हो सकते हैं : (१) मूंगेके रंगका रेशमी वस्त्र (२) आसामका सुप्रसिद्ध मूँगा रेशम (३) मूंगीपट्टन (पैठन) की बनी सुप्रसिद्ध साड़ी। यह स्थान औरंगाबादसे २ मील दक्षिण पश्चिम है और मध्यराज्यमें अपने वस्त्रोंके लिए प्रसिद्ध था। मविडा—वर्णक समुच्चयमें मण्डीक और माण्डलिका नामक वस्त्रोंका उल्लेख हुआ है। जान अर्विनने मण्डिल नामक वस्त्रको रेशम और सूत मिश्रित पाटीदार वस्त्र बताया है जो काफी चमकीला होता था। यह वस्त्र बंगालमें मालदा कासिमबाजारके क्षेत्रमें तैयार होता था। माण्डलिया सम्बन्धमें मोतीचन्द्रकी धारणा है कि यह उत्तरी गुजरातके माण्डलियाकस्बेमें तैयार होता था। घुंगरी—घूँघरी । (४) एकरंग्ड—रंग्ड रेशमीवस्त्रको कहते हैं। एकरंग्डसे तात्पर्य एक रंग वाला रेशमी वस्त्र है। रूप—उठा हुआ। गुजराठी—गुजरातका बना हुआ। इसका कजराती पाठ भी सम्भव है। उस अवस्थाम इसका अर्थ होगा काजरत रंगाया। (५) दरिया—सम्भवतः धारीदार वस्त्र जिसे फारसीमें दरियाइ कहा गया है। इसका झुरिया अथवा डुरिया पाठ भी सम्भव है। झुरिया (डोरिया) धारीदार वस्त्रको कहते हैं किन्तु वह सूती होता है। पन्हरीदा—जायसीने पदमावतमें पैनौदरा नामक वस्त्रका उल्लेख किया है (१९९।१) ।