चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११८ १०५ (रीडॅण्ड्स ६३) जबान बाबल राज भर रसुकान (दूतोँ को राव का उत्तर) सुन परधान बोल तूँ मोरा । कइस तू छाड़ साउँ गड़ तोरा ॥१ दण्ड तोर हौं लेहीं नाहीं । घोड़ लाख दोइ मोहि तलआहीं ॥२ आइ कहु तुम अरथ दिसाऊँ । तीरथ गोभर आज बसाऊँ ॥३ हम तुम सरम करहिं अगराजू । चाँद बिवाह देहु महिं आजू ॥४ जो सुख देहु तो पाट पठाऊँ । बरफे लेउँ तिहि बानि मराऊँ ॥५ जो तुम आवहु डर राख, चाँद पियाही देहु ।६ जो रुचि आवे माँग, सो तुम अबहीं लेहु ॥७ १०६ (रीडॅण्ड्स ६४) जबान बाबन रसुकान भर राउ रूपचन्द रा (राव रूपचन्दके दूताका कथन) हूँ नरिन्द देस कर राजा । अस बोल तिहि कहत न छाजा ॥१ जिन धी होइ सो नाँठ न लिये । बरबतरह अस गारि न दिये ॥२ सो घर पुतर्हिस माइ भुलावा । सो राजा गारी कस पावा ॥३ जा रे महर गारी सुन पावइ । आग छोड़ पानी कइँ धावइ ॥४ चाँद और कइँ (दीन) बियाही । कौन उत्तर अब दीजै साही ॥५ बरु हम मार पियारह, फुनि उठ बारहु गाँउँ ।६ बाँदहि ढवां मिलि भागी, अह्म पार कइ नाउँ ॥७ मूलपाठ—५-४०।