चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१११ १०७ (रौन्दुम १५) दर गुस्सा शुदन राव रूपचन्द बर रसूलान व खामोश मानदन इशा ( राव रूपचन्दका दूतोंपर क्रोध ) अमहिं डीठ विह मार पियारू । खिन एक भीतर गोवर जारूँ ॥१ मूँद फाट के गयँड फिराऊँ । गाल फाड़ कें रूँरा टँगाऊँ ॥२ चीन्ह सून माँसु लै जोँहूँ । पुदुरहिं सून रक्त सब गोँहूँ ॥३ तिह फा यूक्त फरत ढिठाइ । जस माँ कहउँ तइस कहु जाइ ॥४ नाह वेग घाँदा लै आवहु । मुख दुपार टूट लै पावहु ॥५ करवों तम जम चोलेउँ, नाँउँ पसिठ कर आहु ।६ पग फाँद लै आवहु, तूँ इहवाँ दूत नाहु ॥७ टिप्पणी—(२) गवैँडू—गाँव । काइ—निघारु कर । (३) चीन्ह—पी पहि । मूँदुर—गुस्ता । (५) मुख दुपार—मुख्य द्वार । (६) करवों—करूँगा । (७) इहवाँ—यहाँ । १०८ ( रौन्दुम ७४ ) रज हम पैदन शुमुरान कराय बाज गुफ्तन गुर भज गव ( दूतोंको जानेका आदेश ) गजा (बोलिक) दीन्हि रजायसु । सुनहुँ (शमिट कीन्हि) पदायसु॥१ जग मूँ राजा कीन बुराइ । घाँद सबद सुनि गोबर धाइ ॥२ गावर समूँद अन अरगाहा । पूड़हि गइ न पायइ थाहा ॥३ गजा (जा) मरग पड़ पावहु । माँ न पूर घाँदा कँ पारहु ॥४ गजा नगत जा मरग भू आई । घाँद निहारे मूखें निमि पाहूँ ॥५ गगन पह् जा दग, जान इदरों आद ।६ पाट न पैर गजा, यह मणियाहु शाद ॥७ मूलपाठ—१—...