चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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१—पकरहिं मलगकतैं । २—छेदैं । ३—पावठैं । ४—रते । ५—बैठे । ६—सुनहु तुम । ७—पाट परै । ८—डगायहु । —धस्कावहु । ९ —उभारत रोवहि । ११—बइ मयाहर । टिप्पणी—(२) तदिया—उस दिन । जदिया—जिस दिन । (३) ओडम—डाल । (६) संदेशु—संदेशो । (७) अराव—पेड़के गिरनेकी क्रिया । १२६ ( रफ्तींग्स ०१ ) रफ़्तने लौरक बर महर ब बग दहानीदने महर लोरक रा ( लोरकका महरके पास आना । महरका लोरकको पान देना ) पहिले जाइ महर (अरगायहु)¹ । तौ पाछै तुम्ह इसँ जाबहु ॥१ लोरक जाइ महर अरगावा । पेग बीस चल आगैं आवा ॥२ अवनिहि लोरहिं भये परजाई । सगरैं होइ मैं देखेतैं आई ॥३ लोरक सूर बिहसि तूँ मारा । मार पीठ मुख देखउँ तोरा ॥४ हौं तुम्ह यें धीर जो पाऊँ । आधे गोवर राज फराऊँ ॥५ तीन पान कर बीरा, महरैं लोरहि दीन्हि हँकार ।६ घोर देउँ सो आउर पाखर, जो आयहु रन मार ॥७ मूलपाठ—१—अरगावा । टिप्पणी—(१) तौ—उसके । (३) तइस—उसके अनुसार । १२७ ( रफ्तींग्स ०२ ) रवाँ कर्दने लोरक बा याराने खुद दर मिदानजंग ( लोरकका अपने साथियोके साथ युद्धके मैदानमे जाना ) चला खाग ले आपुन साथी । अइबाँ पखरे मँमंत हाथी ॥१ लोहू नदी जनु दह पुचकाइ । तारूँ तरणों सै जनबाइ ॥२