चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५९ १४२ ( रौलेण्ड्स ११ ) दुमान बदन जरक अस कन्दरे सब रूपवन्द ( मारका स्वरूपमुखी सेनाका पीछा करना ) तोरुक कहा जान जनि पावहिं । सम मारों जम फिर न आवहिं ॥१ मार्गहि पायँक कीचहँ भर । ग्यँह रक्त पूइ भरे ॥२ मार महावत हाथी घर । धीर न टाढ़ घोड़ पागरे ॥३ बहुतै लोग जियत घर आवें । बहुतै जीउ लँ निसर पराने ॥४ मारत गरग मूँठ अस लागी । परी माँझ राजा गा भागी ॥५ मरिहें न गुर्झ धरता, रक्त भयउ पंराउ ।६ घला गँवाइ राउ दर आपुन, बहुरि न आवइ काउ ॥७ टिप्पणी—(१) असि—सज न । १४३ ( रौलेण्ड्स ४० ; पंजाब [क] ) सिर । चाउकन उचार नाव ( मुराँ नावका जीव ) गीर्बाह नाना फत्रन हँकारा । फीत समाइ अगिन¹ परजारा ॥१ आब पोर इत गँट तारा । नार समायें कुरुउँ जउतारा ॥२ नाना काठ दग कर आरा । बाँन्द क दर मोटा छारा ॥३ भरग उड़त गरुड़ह र्गानी । खान बगार माँझ दम कीनी ॥४ गुनों मिपार पिंगमुग आरा । ग्न पाय मय जान पुकारा ॥५ पहू माँझ धर गाएव, रक्त भयव ल पुष्ट ।६ भाव भीम परि जँरत, मात मोंम मरि मूष्ण" ।७