चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५८ १४० ( रीकेन्स ९९ ) जम कंदने लोरक बा राव व हज़ीमत खुर्दने राव ( लोरक और रावका युद्ध : रावकी हार ) पठटा लोर संग जस गावा । फल खाँड राजा सर बाजा ॥१ खड्ग तार लोरक कै भाजी । पाखर काट राठ गा भाज़ी ॥२ पिवली जोनें भरसि महराजू । मारसि सिरिछन्द औ सुरैराजू ॥३ धीरगझ मारसि औ फिरे । बंबर आग खाँडे परवरे ॥४ मार सकति लै रफ़त बहाये । खड्ग झार लोहें भुझाये ॥५ आगें दइ लिहसि दर आपुन, हाथ चला धस टाँड ।६ लौटा बाँठ लोर [ ], सबन उझारस खाँड ॥८ टिप्पणी-(५) सकति (सं शक्ति)—तीन नोकोंवाला त्रिशूलके ढंगका छोटा बाण। १४१ ( रीकेन्स १ ) उफ्तादने बाँठ बर मैदान व हज़ीमत खुर्दने राव रूपचन्द बाँठका गिरना : राव रूपचन्दका पराजय उमर बाँठ लोरक धस मारा । परा धोर नर दबी उधारा ॥१ दूसर खाँड जा पैठ सनाहाँ । भुँजीं टूटि उपरि गइ पाहाँ ॥२ उठा छोर सकति कर गहे । मारसि बेरुझ पाखर रहे ॥३ उमर धीर दोउ बरबण्डा । अगिन भरै बर पावत खण्डा ॥४ गरद सेंजोइ बाँठ खसि परा । हियें पाठ दइ लोरक धरा ॥५ धरसि तार तरवारि कण्ठहुत, काट पसा लै मुण्ड ।६ माजि चला बर राठ रूपचंद, दंख पड़ा भइ रुण्ड ॥७ टिप्पणी-(४) बरबण्डा (वरिवण्ड)—बलवान प्रचण्ड दुर्धर्ष।