भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१५७ १३८ (रीडिंग्स ९७) मुशावरत कर्दने राव रूपचन्द बा बाँठा (राव रूपचन्दका बाँठासे परामर्श) राइ कहा बाँठा कस कीजइ । सब दर खोप नगर किन लीजइ ॥१ ओ तिहँ राइ आपुन पँछवाइ । चाँद सनेह झूस पुनि पाई ॥२ पहिरै खाँड अनै तस जोरी । देखहिं देख बतीसो कोरी ॥३ पेखहिं पेखहिं मयठ अमेरा । चला भाजि राजा फर फेरा ॥४ चाँदा कारन जूस पुनि पायी । औ तिहँ रकतहँ मयठ बिगचा ॥५ लै वो पखरिया समता महँ, गाँठह कस कीज ।६ फै चाँदा लै जाइ राजा, फ गोबरौँ खिउ दीज ॥७ टिप्पणी—(२) दूसरी पंक्तिका उत्तर पद और पाँचवी पंक्तिका पूर्वपद लगभग एक-सा है । (५) प्रतीक अनुसार पाठ ठीक होते हुए भी पूरी पंक्तिके शुद्ध पाठ होनम सन्देह है । १३९ (रीडिंग्स ९८) जवाब दादन बांठा बर राव रूपचन्द रा (बांठाका उत्तर) राइ पखरिया माँ पहिं देहु । अदमी तीन चार तुम्ह लेहु ॥१ लै अभरौं हा राउत वहौं । पाछ मोर न छोड़हिं तहौँ ॥२ परा महर असि परी मढानी । बाँठ पिनवै तिहँ फे आनी ॥३ दुरि लै बाँठा तिहँ सुइँ गयउ । जहाँ अमेर महर सों अभयउ ॥४ [L25: दूध पियावत फिरैं हि न कोई । अब कँ मर्यै काल कित होई ॥५ परे पखरिया नौ दस, मल पानै होइ फाग ।६ महर सनाह टूटि गा, आछ गाँठ घर लाग ॥७