भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 185

आठ आइ दोइ आनें, जैस अधार कै मेह ॥६ लोइ पहिरे सब ठाढे, तिल एक सूझ न देह ॥७ टिप्पणी—(१) डाकबइ—हमलेनाइक । (४) सामनें—सैनिक; प्रधान । (६) अधार—आषाढ । १३७ (दीर्घोद्देश ५६) सिफते जग करदने बाँठा या गोरक ब हजीमते खुरदने ऊ (बाँठा-गोरक युद्ध । बाँठा की हार) उभरे खड़ग कुन्त तरबारी । घिर एक तह होइ रनमारी ॥१ टूटहिं मुण्ड रुण्ड धर परहीं । सियफर खोम न चिंत महँ धरहीं ॥२ खरख डँडाइर बाजहिं तारा । भये भाग भर रन रतनारा ॥३ अस फागुन फूलहिं बन टेसू । तस रन रक्त रात भये मेसू ॥४ बाजहिं भेरि सींग औ तूरा । दर भा घाचर रकत सिंदूरा ॥५ परे पखरिया चहुँ दिसि, कुन्त राज सर लाग ।६ महर वीर कुछ ठहरे, बाँठा जिठ खइ भाग ॥७ टिप्पणी—(३) डँडाइर—दण्डताल; ताल देनेका वाद्य । तारा—करताल । (४) टेसू—पलाशका फूल । यह फागुनके महीनेमें होलीके आसपास फूलता है। इसका रंग गहरा लाल होता है। जब फूलता है तो पूरे वृक्ष पर छा जाता है और दूरसे देखने पर भान पडता है कि जंगलमें आग लगी हुए है। (५) भेरि—मृदंगसे मिलता जुलता वाद्य। ब्रजमें लम्बी तुरहीके समान एक बाजेको भी भेरि कहते हैं। सींग—(सं शृंगिन् > सिम > सींग)—पशुके सींगसे बना फूंकनेका वाद्य । आइने-अकबरीमें नक्करखानेके बाजोंमें इसका उल्लेख है। वहाँ कहा गया है कि यह गायकी सींगकी शकलका तांबेका बनता है और एक साथ दो बजाये जाते हैं। तूरा—धातुका बना मुँहसे फूँकनेका बाजा । कदाचित इसे ही आजकल तुरही कहते हैं। (६) पखरिया—पाखर (कवच) धारी सैनिक । (७) उभरे—ताकतमें अधिक ।