भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१९५ रनमल मरत सिरीचंद आवा । रनपत पाखर खाल खिंचावा ॥४ अजैराज सेंगर कर गहे । मारसि मेलक पाखर रहे ॥५ छाइ सिरीचंद पाखर भागा, झिठ लै गयउ पराइ ।६ राइ देखि चौंठा, तुम कस झूज न जाइ ॥७ टिप्पणी—(२) 'जम्भ बजाइ पेरि उतरा' पाठ भी सम्भव है । १३५ (रैकिड्स ९४) आल्हने चौंठा का फौज जुड़ कर मैदान भगा ( युद्धक्षेत्रमें ससैन्य चौंठाका आगमन ) धीरपाल करपत लै आवैं । मजवीर हमीर सनेफन पुलावैं ॥१ करमदास मतिराज देवानन्द । बिजैसेन औ महरास बिर्जचन्द ॥२ पिस्तनगर ष देखें ताको । इग्दीन खीस मरदेठ जाको ॥३ देपगढ हरराम सरूपा । अजयसिंह हरपार निरूपा ॥४ धीरू हरशु गनपत आनौ । सिउराज मदनूँ भल जानौ ॥५ तीस पखरिया आनौ, सब दर मारौ आज ।६ हाथिपाइ धन चौंदा लीजइ, गोवर कीजइ राज ॥७ १३६ (रैकिड्स ९५) बिरथानने महर लरक का मुकाबिले भोंगा ( महरका चौंठाका सामना करनेके लिए कौरवका भजना ) आनं पीर चौंठा लइ आवा । महर टेरि औ लार पुलावा ॥१ रास्क बीर पगरिया पारहु । पठै डाकनइ सीम हैंकारहु ॥२ पाँच दंम पाँच पाँझानौं । गतरी पाँच दम जिटिं जानौं ॥३ नाऊ एक तीन भाइनैं । पागर एक सगद फँ गिन ॥४ गहरवार औ शाद दम आनी । पागर कृष्ठ तुलानेउ जानी ॥५