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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१६१ १४५ ( रोकेन्दम् १ १) दर आमदने चाँदा बर बामारे कस व दीदन तमाशा लोरक व हुयने बिरस्पत रा वा खुद (बिरस्पतके साथ चाँदका महलकी छतपर जाकर लोरकका सुरूप देखना) चाँद धौराहर ऊपर गयी । घेरि बिरस्पत गोहन लगी ॥१ परी साँझ जग मा अँधियारा । चाँद मंदिर घइ गइ उजियारा ॥२ सो कस आहु जें गोबर उघारा । कवन बीर जिहूँ कटक संघारा ॥३ कौन मनुस जिहूँ कीन्ह हनाँ । धन सो जननि अस जे जनाँ ॥४ पूछिउँ धाइ बचन सुन मोरा । इहँ दर कौन सो कँकूँ लोरा ॥५ कवन रूप गुन सुन्दर, आँखौं बिरस्पत तोहि ।६ साध मरस हों बीरन, लोर दिखायहु मोहि ॥७ टिप्पणी—(१) गोहन—साथ । (२) मंदिर—आजकल मंदिरका प्रयोग देवस्थानके लिए किया जाता है; पर मध्यकालीन साहित्यम सुन्दर भवन और राजपुरुषोंके आवासको मंदिर कहा गया है। बाणने महासामन्त स्कन्दगुप्तके मंदिरका उल्लेख किया है। (३) उघारा—उद्धार किया । (७) साध—इच्छा । १४६ ( रोकेन्दम १ ४। फारसी) निशानी नमूने बिरस्पत चाँदा रा अज जवासे सूरते लोरक (बिरस्पनका चाँदका लोरकका रूप बतलाना) लागइ चाँद सुरुज कें जोती । कुण्डर सोन देंह गजमोती ॥१ बैंदर तिलार' धरा अनु लाइ । चमक घसीमी अतइ सुहाई ॥२ शृगिषा बेस रंक सह आइ । ऊँक छीन कोने पचमाइ' ॥३