चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६७ श्वेत) । फैंचा—कञ्च लखमोंदरी नामक पक्षी जो बत्तख और मुर्ग़ीके बीचकी जातिकी होती है । कंचिपच—टोकरियों भर, असंख्य । (२) उसरहकोया—इसे उसरहगेदा भी कहते हैं । यह भूरे रंगकी होती है और अक्सर दो-तीन सौके झुण्डमें एक साथ पायी जाती है । (३) परवा—कबूतर । रटोटा—रटोळकर । (४) बनकुकुरा—बनकुक्कुट, बनमुर्गी । फेरमोरो—चरख चरत सोहन यह मोरके समान किन्तु उससे छोटा होता है । कैंज—कुञ्ज, क्रौंच कुरंग । १५५ ( रौदैन्ट्स ११३ ) सिफ़ते पुजानीदने ताआम दर मतबख़ ( भोजन बनानेका वर्णन ) तीन भाग सैं बैठ सुपारा । घीठर आन रसोई परजारा ॥१ मास मसोरा कटवाँ कीन्हाँ । लै घँगार पतियों कर दीन्हौँ ॥२ बेगर बेगर पखि पकाई । घिरत बघार मिरष भराई ॥३ मिरचन अँबिरचन बनबा वय । रस रसनाकर सेंधो गेरा ॥४ कूँकूँ मेलि कियो धमथारू । दराँद कराँद अँबिली घारू ॥५ फनक तराफत खसोर, लोन तेल बिसवार । ६ खटरस होइ महारस, तिलकुर कियउ अहार ॥७ टिप्पणी—(१) सुपारा—सूपकार, रसोइया । आन—आकर । परजारा—(सं प्रज्वलन > प्रा पज्जलय पज्जेल > पज्जर > परजरना) प्रज्वलित किया जलाया । (२) मसोरा—कचार, पीसकर बनाया हुआ । कटवाँ—काटकर बनाये हुए । घँगार—शाकन बघार । (३) बेगर बेगर—तरह तरहके; भिन्न-भिन्न प्रकार के । बघार—छारा । (४) सेंधा—सैन्धव सेंधा नमक । (५) कूँकूँ—केसर । मेलि—मिलाकर । धमथारू—छौंकक मसालेस छौंका ।