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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१५५ साठज दीस न अबरा, अनैं सै घर जाइ ॥६ जवैंत पंखि सैंकोले, कही (बिरंत) सब गाइ ॥७ मूलपाठ--(५) बरारे । (७) भरत (मुकठोंके अभावमें यह पाठ है) । टिप्पणी-(१) रोझ (सं रुष्य>प्रा रोक्ख)—नीलगाय । चीतर—चीत्तल एक प्रकारका मृग । झाँख—साँभर । (३) गौज—एक प्रकारका बारहसिंहा जिसे गौंद भी कहते हैं। पुकारी— मोर । ओखरा (लोखहा)—लोमड़ी (लोमड़ी खाद्य है यह संदिग्ध है) । ससा—शशक खरगोश । डॅवकन्ना (लम्बकर्ण)—लम्बे कान वाला खरगोश । खर—लोम्बा शूकर पूरा सूरा । (५) साउज—(स स्वापद्>साउअअ>साउज)—जंगली जानवर। बनझुक (बनैक)—जंगली । यहाँ सूअरसे अभिप्राय है । (६) दीस—दिखाई पड़ा । अबरा—सुकर । अनै—अनेक । १५३ (अप्राप्य) १५४ (रौकैनुस्स ३१२) विपते ब्यनबराअ दर प्वाखते महर (पक्षियोंका वर्णन) भटर तीतर लावा घरे । गुडरू फैंबों खचियन भरे ॥१ बहुरु बिगुरिया औ बिरयारा । उसर सकोवा औ मनबारा ॥२ : परबा सेतकार बलोरा । रैन टिटहरी घरे टटोरा ॥३ बनकुकुरा केरमोरो घने । कुँज महोख साँय न गिने ॥४ घरे कोयरें अँगहसी घनों । पंखि बहुरु नाँउँ को गिनौं ॥५ जे कय माप समान, सरभस बरन के तेहि ।६ अउर पंखि जे मारे, ताकर नाँउँ को लेहि ॥७ टिप्पणी-(१) लावा—(ल्वा) बटेरसे छोटा इसी जातिका पक्षी (बटन क्वेल) । गुडरू—बटेर जातिका इसी नामसे ख्यात पक्षी (कामन बस्टर्ड

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