चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६५ १५१ ( रीलेनहूल १ ९ ) कबूल कर्दने महर सुखुने चाँदा ब इस्तेदाब दादने इसे बस्क रा ( चाँदाके अनुरोधपर ज्योनारका आयोजन ) चाँद बचन हौं फहवाँ पावउँ । सब गोवर औ देस जिंवाषठँ ॥१ महरैं नाउहिं कहा बुलाई । घर घर गोवर नोवहु जाई ॥२ काल्हि महर घरँ बेंधनारा । थार झाइ सब झार हँकारा ॥३ सुनिकै नाउ दसा दिसि गये । तैंतीसों पार सब नोता लिये ॥४ खोंट खोंट सब नोता झारी । अथवाँ सुरुज परी अँधियारी ॥५ पारध पठये अहेरे, औ बारी पनवार ।६ पछिले रात आये बहुरि, नाउ सहदेव (दुआर) ॥७ मूलपाठ—(७) महर । टिप्पणी—(३) झार—एक एक करके । (४) दशा—(बारही) दस । पार—पांत; पंक्ति समूह यहाँ जातिसे तात्पर्य है । (६) पारध—शिकारी । पठये—भेजा । बारी—पत्तल बनानेवाली जाति । पनवार—पत्तल । १५२ ( रीकैण्ड्स ११ ) आवर्दने सैय्यादाने हैवानाते हर किस्मौ ( अहरियोंका अहेर लेकर आना ) दिन भा पारघ आइ तुलाने । अगनित मिरग जियत घर आने ॥१ बहुतैं राझ गेंड़ना न गिने । तीतर झाँउ औहि न गिने ॥२ गाँन पुछारि औ लोरउरा । ममा लैंप्रस्नों घर एक [सँकरा*] ॥३ मेढ़ा सहस मार के टाँगे । थार पाँच मै बकरा माँगे ॥४ औ माउव मह पनइल मार । सैंपर पार का फई न (पारे) ॥५