चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५४ कहु सो पात जिहँ सँअस मई । काइ लाग भर कँगर गई ॥३ चाँद बिरस्पत कै पाँ परी । कान्हि सुरुज देखउँ एक घरी ॥४ कै यह मोरें घरैं बुलाबहु । कै मैं ले बोकै (ढिंग) लावहु ॥५ चाँद गुनित मैं देखी, सुरुज मंदिर जिहँ आठ ।६ कर महर सँठ बिनती, गोवर नोत खिवाँठ ॥७ मूलपाठ—(५) इन्द । गाफका मस्कूफ़ छूट जानेसे यह पाठ है । टिप्पणी—(३) घरी—घड़ी । ४५ मिनटकी एक घड़ी होती है । (४) कान्हि—कब । (५) कै—या तो । बोकै—उसके । १५० (रीडैन्ट्स १८) रफ़्तने चाँदा बर महर व अर्ज शाश्त मेहनानिये कमर करदन (चाँदके महरसे बन-भोज करनेका अनुरोध करना) बिरस्पत बचन चाँद चित धरा । हींडर पूरि खाँड पिठ भरा ॥१ सुनतैं बचन महर पहँ गयी । आइ ठाढ़ि आगैं होइ भयी ॥२ एक ईछ इछी मैं पीता । दोतुम्ह राठ रूपचन्द बीता ॥३ दंवहिं पूजा फूल चढ़ाऊँ । पायँ लाग कर काइ मनाऊँ ॥४ पिता मोर भो रन बित आइह । दस लोग सम नोत खिवाइह ॥५ पर यह बाष जो कीन्हेउँ, अरज हाथ सा नारि ।६ राइ राइग रन जीत, आयहु कटक मँघारि ॥७ टिप्पणी—(१) हींडा—हृदय । (२) ठाढ़ि—खड़ी । (३) ईछ—इच्छा । ईछी—इच्छा किया संकल्प किया । (४) आइह—आवेगा । खिवांइह—भोजन करावेगा । (६) बाष—बचन ।