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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१५३ १४८ (रोडैंग्ड्स १ ६ : पंजाब [का]) फ़हम करने विरसत चाँद रा कि होशियार बाश (बिरस्पतका चाँदको समझाना) कहइ बिरस्पत चाँद सँभारू। सुरुज लागि कस करसि खमा[रू]१॥१ हाथ पाठ समरस नहिँ पारी। धाँधु फेस ओढ़ि लै सारी२॥२ जोस लागि सुरुज कै झारा। कै खंडवान पिआऊँ सारा३॥३ राजकुँअरि सँ कान न फरसी। हीँसो घाइ मोर लाज न घरसी॥४ आनौँ पानि बैसि मुख धोवहु। अन्दर५ सेज सुख निदरा सोवहु६॥५ वो चित्त है तुम्हा (यसा), भोर कहठ मोहि।६ रैन जाइ दिन अगवह, उतर देउ मैं तोहि७॥७ पाठान्तर—पंजाब प्रति— फोदोम शीर्षक अपाठ्य है। १—कमारू। २—मारी। ३—यह पंक्ति अपाठ्य है। ४—रान करी। ५—उल्र। ६—यह शब्द कट गया है। ७—फोदेस में दोहा अपाठ्य है। मूलपाठ—(६) निहा। टिप्पणी—(३) झारा (भ. ज्वाला>झार) तेज। खंडवान—गौंडका पानी थरकत। (५) अन्दर—अन्दर। यह अपपाठ जान पड़ता है। पंजाब प्रतिका पाठ उल्र अधिक संगत है (उल्र—आरामसे लेटना; निश्चेष्ट होकर पड़ रहना)। १४९ (रोडैंग्ड्स १ ७) पम्दादने विरसत चाँद रा अज आमदन लोरक दर स्यान (बिरस्पतका लोरककी दर मुकानका उपाय चाँदको बताना) गयी सो खेल रैन अँधियारी। उठा सुरुज खग किरन पसारी॥१ दिन गय घरी बिरस्पत आइ। चाँद फुर आन जाइ जगाइ॥२