चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंक्षेत्रमें बकोरा कहते हैं। परबर—परवल। यह लता पर होता है और गरमी-बरसातमें फलता है। कुँदरूँ—(सं —कुन्दुक)—परवलके आकारकी सब्जी जो बरसातमें होता है। इसे संस्कृतमें बिम्ब या बिम्बक भी कहते हैं। पकने पर इसका फल लाल हो जाता है। इसी कारण कवियोंने ओठोंके उपमानके रूपमें इसका प्रयोग किया है। घी तुरई—घिया तोरोइ। यह भी बरसाती तरकारी है और बेल पर होती है। अरई—अरबी, घुइयाँ। यह जमीनके भीतर होता है। इसके पत्ते कमलके पत्तोंके समान होते हैं। (४) पालक—यह पत्तेदार तरकारी है। इसके पत्ते चौड़े और चिकने होते हैं। चालाई—यह बरसाती साग है। इसकी पत्ती चिकना तथा लाल अथवा हरे रंगका होता है। (५) कोहड़ा—कद्दू। यह लतामें उगनेवाली तरकारी है जो आकारमें लम्बी और मुलायम होती है। चिचिँडा—यह सौंपकी तरह लम्बा और धारीदार तरकारी है जो बरसातमें होती है। तोरई—घियातरोइ की जातिकी तरकारी। सेंब—(सं शिम्बा शिम्बिका) सेम; लतामें लगनेवाली पत्ती जातिकी तरकारी। (६) गलगल—गलगल, एक प्रकारका खट्टा नीबू। (७) संधान—अचार। १५७ (रीडेण्डस ११५) सिफत पकवान दर हर जिन्सी गोयद (पकवान वर्णन) बरा मुगौरा बड़सें फीन्हें। सैँहुई फाड़ि घिरत में दीन्हें ॥१ बने मियौरी छवकुल धरे। औ डुबकी जिहँ मिरिचैं परे ॥२ भुँजी फँध फरेष पकावा। पनि अढ़ाकर गुलियें लावा ॥३ रोटा गूँद किये मिरचपानी। आर उभार शाह कर पानी ॥४ तुरसी घालि फनी ओटाई। एसी सोंठ बहुत कें लाई ॥५ दूध फारि कें खिरसा, घौंधा दही मठाठ ।६ और खंडइ को कहि, जाफर नाँउ न आउ ॥७