चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७४ टिप्पणी—इस कड़वक में ३ प्रकारके चावलके नाम इस प्रकार गिनाये हैं— (१) गीरस्रार (२) रितुसार (३) विकौनी (४) वगं (५) धनिमा (६) मधुकर (७) तूनी (८) सगुनों (९) छभी (१०) चौधरा (११) ककर (१२) मँडर (१३) काँडर (१४) अगरसार (१५) रत्ना (१६) मत्सरी (१७) राजनेत (१८) भौदी (१९) घोरतरी (२०) करेंगेी (२१) करेगा (२२) साठी (२३) सुरमा (२४) मंशा (२५) महत्तर (२६) आगरधनी (२७) रूपसिया (२८) दहिंसोंधी अथवा छोनबड़ी (२९) वैदोशा (३०) शशिभूपी। इनमें से केवल ४-५ नाम जायसीकी सूची (पदमावत, ५४४) में मिलते हैं। इन सब चावलोंकी पहचान हमारे किए सम्भव नहीं हो सकी। (१) रितुसार—(सं रक्तशालि > रक्तसारि > रितुसार)। रक्तशालिका संस्कृत साहित्यमें प्रायः उल्लेख मिलता है। सम्भवतः यह लाल रंगका धान होगा। विकौनी—सम्भवतः यह जायसी उल्लिखित बिकौरी होगा। मधुकर—हलके काले रंगका पतला छोटा महीन धान; इसका चावल सफेद और इसमें हल्की सुगन्धि होती है। यह अगहनी धान है जो रोपा जाता है। (२) सगुनों—(सं शकुनी) इसे शगुनी या सठनी भी कहते हैं। इसका दाना महीन और चावल अत्यन्त सुगन्धित होता है। मेंडर—यद्यपि निश्चित नहीं पर हो सकता है यह जायसीका मेंडचिला हो। काँडर— यह धान दो प्रकारका होता है—(१) घीकाँडर जो पिठिकाँवों भी कहा जाता है और (२) दुधकाँडर। इसकी भूसी लाल और चावल सफेद और मोटा होता है। यह बिना घी दूधके ही स्वादिष्ट होता है। (३) राजनेत—सम्भव है वही चावल हो जिसे आज कल राजभोग या राय भोग कहते हैं यह धान आकारमें बहुत छोटा और छिटककर बोया जाता है। इसमें सुगन्धि होती है। (४) करूँगी—लाल अथवा काली भूसीरा धान। इसका चावल छोटा और हल्का लाल होता है और खानेमें मीठा होता है। करेंगा—करूँगीकी जातिका धान जो आकार में कुछ बड़ा होता है। साठी—करूँगीकी ही जातिका धान या नाटा मोटा होता है और कुछ रक्ताइ लिए रहता है। इसे मदह कहते हैं। इसके सम्बन्धमें उक्ति है—साठी पाके साठ दिनों। जब महउ बरिसै रात दिनों॥ मंशा—इसका हंसा पाठ भी सम्भव है। जायसी की सूचीमें रायहंस और हंसामोरी नामक दो चावलोंका उल्लेख है। रायहंस तो कदाचित हंसराज नामक प्रसिद्ध चावल है। इसकी भूसी सफेद होती है और वह पुआलके बाहर आकर पकता है। हंसा