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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१७२ भौरीका छिलका उज्वल और पाकेका भी सफेद होता है । इसका फल मुलायम होता है । यह अगहनी धान है । इसे सुबऊमरी या सुपात्र भी कहते हैं । (७) इसके दूसरे पद का पाठ—रूपसिंघा बहिसैंची भी हो सकता है । पर दोनों ही अवस्था मात्राओंकी न्यूनता है । इस कारण कहना कठिन है कि चावल का नाम सोनदही है या बहिसैंची । (६) पप—माँड । पसाय—निचोड़ कर । १५९ (राँकेण्ड्स ११० ; बम्बई १४ ; पंजाब [प] ) सिफत गन्दुम व नाने मैइये खालिस (गेहूँ और शुद्ध मदेकी रोटीका वर्णन) हाँसा गोहूँ धोइ पिसाइ । कपर छान कै छार' बनवाई ॥१ अतिमँदपहुती' धरु भर तोला । सेत सुहाठ' फूँज' अनु दोसा ॥२ टूटै न सानौँ दुँहु कर बोरा । नैमूँ मास हाथ जनु बोरा ॥३ अठरै साथ मरे गार्स सलानी''। मुख मेलत खिन बाहिँ 'बिसानी''॥४ सकर देसँ जेवँहिँ चित लाई । मरे न पेट न भूख भुखाई'' ॥५ कपुरबास'' पर सुख", माँगत चाहि उड़ाइ ।६ मार सहस दोइ' तिलकुट, महरै घरे बनबाइ ॥७ पाठान्तर—बम्बई और पंजाब प्रति— शीर्षक—(ब) सिफते गन्दुम व नाने दोम (गेहूँ और मोटी रोटीका वर्णन)। (प) शीर्षक उपलभ्य पोथी में अप्राप्य है । १—(प) हंसा । २—(ब) साफ । ३—(प) पोचा । ४—(ब) कडमपती (प) बडबड सुभर । ५—(ब) सुहाइ । ६—(ब) सूँज । ७—(ब) तानिँ (प) तनै न टूटे । ८—(प) कठरै । ९—(ब प) एक । १०—(ब) काउ । ११—(पं ; ब) तलाई । १२—(ब) बहु जाई । १३—(ब प) बिलाई । १४—(ब, प) सब दिन । १५—(बं०-जैठ को (प) जो जीह । १६—(प) भूख न खा । १७—(ब) कर मास, (प) केवरबास अथवा कफूरबास । १८—(प) मुख तर । १९—(प) दए ।